
मध्यप्रदेश के सतना और मैहर जिले की राजनीति इन दिनों मुकुंदपुर और आसपास की पंचायतों को लेकर असामान्य रूप से गरमाई हुई है। मामला अमरपाटन तहसील के अंतर्गत आने वाले मुकुंदपुर, आनंदगढ़, आमिन, धोबहट, परसिया और पपरा ग्राम पंचायतों का है, जिन्हें मैहर जिले से अलग कर रीवा जिले में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस प्रस्ताव को लेकर न सिर्फ स्थानीय लोगों में गहरी नाराजगी है, बल्कि सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ही इस कदम के विरोध में एकजुट हो गए हैं। यहां तक कि बीजेपी के कुछ नेता भी अपनी ही सरकार के खिलाफ खड़े हो गए हैं।
विवाद तब और बढ़ गया जब एडीएम का एक लेटर सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। जानकारी के मुताबिक यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री कार्यालय के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी के जरिए प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग तक पहुंचा था। आयोग ने हाल ही में मैहर कलेक्टर से इन पंचायतों पर विस्तृत अभिमत मांगा है। वहीं, मुकुंदपुर की ग्राम सभा पहले ही लिखित रूप में साफ कर चुकी है कि यदि भविष्य में परिसीमन होता है तो उन्हें रीवा जिले में शामिल न किया जाए।
राजनीतिक मोर्चे पर भी बयानबाजी तेज हो गई है। सतना सांसद गणेश सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस कदम को “पहचान छीनने की साजिश” बताया और कहा कि यह अमरपाटन विधानसभा और सतना लोकसभा क्षेत्र की एकता पर सीधा हमला है। कांग्रेस विधायक व पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र कुमार सिंह ने इसे “डेप्युटी सीएम की चालाकी” करार दिया और चेतावनी दी कि यह प्रयास किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा।
बीजेपी के मैहर विधायक श्रीकांत चतुर्वेदी ने भी विरोध जताते हुए कहा कि मुकुंदपुर की विश्वस्तरीय व्हाइट टाइगर सफारी मैहर की शान है और इसे अलग करना अस्वीकार्य है। पूर्व मंत्री रामखेलावन पटेल ने इस इलाके को अमरपाटन की “धरोहर” बताते हुए रीवा में विलय के विचार को खारिज कर दिया। वहीं, मैहर के पूर्व विधायक नारायण त्रिपाठी ने सीधे डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला पर आरोप लगाते हुए इसे “छीनने की कोशिश” बताया और कोर्ट व जनांदोलन के जरिए संघर्ष का ऐलान किया।
इस विवाद की जड़ मुकुंदपुर स्थित दुनिया की पहली व्हाइट टाइगर सफारी है। आरोप है कि प्रस्तावित परिसीमन के जरिए सफारी को मैहर से रीवा जिले में स्थानांतरित करने की कोशिश की जा रही है। अक्टूबर 2023 से पहले, जब मैहर जिला नहीं बना था, तब सफारी सतना जिले का हिस्सा थी। उस समय भी सरकारी पोर्टल पर इसे रीवा में दर्शाने को लेकर विवाद खड़ा हुआ था, और आज भी रीवा जिले की आधिकारिक वेबसाइट पर यह जानकारी मौजूद है।
अब नजरें प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन आयोग की रिपोर्ट और सरकार के अंतिम रुख पर टिकी हैं। लेकिन फिलहाल मुकुंदपुर और उसकी पांच पंचायतों के रीवा में विलय की कोशिश ने सतना-मैहर की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया है, और सत्ता-विपक्ष का एक मंच पर आना इस मामले को और भी गंभीर बना देता है।













