
मऊगंज जिले के पुलिस महकमे में 16 मार्च की रात जो शर्मनाक मंजर देखा गया, उसने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ और न्याय की उम्मीद को लहूलुहान कर दिया है। मऊगंज थाना प्रभारी संदीप भारती पर आरोप है कि उन्होंने ‘शराब के नशे’ में चूर होकर न केवल एक प्रतिष्ठित अधिवक्ता संजय तिवारी को अपमानित किया, बल्कि उनके साथ आए सत्ताधारी दल भाजपा के कार्यकर्ताओं को भी ‘औकात’ दिखाने की धमकी देकर थाने से बाहर फिंकवा दिया।
दहशत और बदसलूकी का लाइव मंजर
पीड़ित अधिवक्ता संजय तिवारी जब ग्राम कुलबाहेरिया में हुई चोरी की रिपोर्ट पर कार्यवाही की जानकारी लेने थाने पहुँचे, तो उन्हें क्या पता था कि वहाँ न्याय नहीं, बल्कि ‘गालियाँ’ मिलेंगी। आवेदन देखते ही टीआई संदीप भारती आगबबूला हो गए और चिल्लाते हुए बोले— “कैसे फालतू लोगों को कुर्सी पर बिठा लेते हो, बाहर निकालो इन्हें।” चश्मदीदों और पीड़ित का दावा है कि साहब इस कदर नशे में थे कि उन्हें अपनी वर्दी की मर्यादा का भी होश नहीं था।
“मंत्री-विधायक से कह कर करा लो मेरा ट्रांसफर”
हैरत की बात यह है कि जब भाजपा कार्यकर्ताओं ने इस अभद्र व्यवहार का विरोध किया, तो संदीप भारती ने सीधे सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को चुनौती दे डाली। उन्होंने सीना ठोककर कहा— “मेरा नाम संदीप भारती है, जो उखाड़ना हो उखाड़ लो। जिस मंत्री-विधायक से चाहो मेरा ट्रांसफर करा देना, मैं नहीं डरता।” एक लोक सेवक के मुँह से ऐसे शब्द यह बताते हैं कि मऊगंज पुलिस अब ‘जनता की रक्षक’ नहीं, बल्कि ‘बेलगाम भक्षक’ बन चुकी है।
गडरा कांड का ‘कलंकित’ चेहरा फिर मऊगंज में सक्रिय!
यह वही संदीप भारती हैं, जिनका नाम ‘गडरा दोहरी हत्या कांड’ की उस काली सूची में शामिल था, जिसके कारण शासन ने जिले के 5 बड़े अधिकारियों को नाकारा मानकर हटाया था। लेकिन सवाल यह है कि आखिर कौन सा ‘रहस्यमयी आशीर्वाद’ इन्हें बार-बार मऊगंज में पोस्टिंग दिला रहा है? क्या मऊगंज को ऐसे ही ‘दागी और विवादित’ अफसरों की प्रयोगशाला बना दिया गया है?
एसपी कार्यालय में हल्लाबोल: अब आर-पार की लड़ाई
इस घटना से आक्रोशित होकर दर्जनों भाजपा कार्यकर्ताओं और अधिवक्ताओं ने एसपी कार्यालय का घेराव किया। पीड़ित पक्ष ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटे के भीतर संदीप भारती को निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू नहीं की गई, तो मऊगंज की सड़कों पर ‘महा-आंदोलन’ होगा।













