मऊगंज कलेक्ट्रेट और एसपी ऑफिस के सामने से पुलिस की ही 2 गाड़ियों की बैटरियां पार; 24 घंटे की सुरक्षा और सीसीटीवी के दावों की चोरों ने निकाली हवा, महकमे में मचा हड़कंप, जनता पूछ रही— ‘जब पुलिस खुद सुरक्षित नहीं, तो आम आदमी का क्या होगा?’

मऊगंज: मऊगंज जिले के सबसे हाई-प्रोफाइल और अति-सुरक्षित माने जाने वाले प्रशासनिक परिसर से एक ऐसी सनसनीखेज और शर्मनाक चोरी की वारदात सामने आई है, जिसने पूरे पुलिस महकमे की चौकसी और सुरक्षा व्यवस्था पर बेहद गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। चोरों ने किसी आम नागरिक को नहीं, बल्कि सीधे कानून के रखवालों को चुनौती देते हुए कलेक्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय के ठीक सामने खड़ी पुलिस की ही 2 सरकारी गाड़ियों को अपना निशाना बनाया और रात के अंधेरे में बेखौफ होकर उनकी बैटरियां चुरा ले गए। शातिर चोरों ने वहां खड़े 1 अन्य शासकीय वाहन के पुर्जे उड़ाने का भी पूरा प्रयास किया, लेकिन तकनीकी खराबी या किसी आहट के चलते वे उसमें कामयाब नहीं हो सके। यह दुस्साहसिक वारदात उस परिसर के भीतर अंजाम दी गई है, जहाँ 24 घंटे हथियारबंद पुलिसकर्मियों का पहरा, तीसरी आंख यानी सीसीटीवी कैमरों की कड़क निगरानी और सघन रात्रि गश्त करने के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। इन तमाम दावों को ठेंगा दिखाते हुए चोर मऊगंज के सबसे सुरक्षित जोन में दाखिल हुए, वारदात को अंजाम दिया और किसी को कानों-कान भनक तक नहीं लगी।

इस वीआईपी सुरक्षा में हुई इतनी बड़ी सेंधमारी का खुलासा तब हुआ, जब सुबह ड्यूटी पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने वाहनों को चालू करने के लिए उनकी जाँच की, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई क्योंकि गाड़ियों से कीमती बैटरियां गायब थीं। कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर पुलिस वाहन से चोरी की खबर जंगल में आग की तरह फैलते ही पुलिस महकमे के आला अधिकारियों में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में तकनीकी अमले को मौके पर बुलाया गया। अपुष्ट सूत्रों और चर्चाओं के अनुसार, आनन-फानन में मामले को दबाने के लिए 1 वाहन में तुरंत नई बैटरी लगाकर उसे जैसे-तैसे चालू किया गया, जबकि दूसरी गाड़ी स्टार्ट न होने पर उसे पुलिसकर्मियों द्वारा धक्का देकर कंट्रोल रूम के सामने लाकर खड़ा किया गया, हालांकि इन दावों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

इस शर्मनाक घटना की गंभीरता को देखते हुए एसपी कार्यालय के एक जिम्मेदार कर्मचारी द्वारा तत्काल मऊगंज थाने में चोरी की लिखित सूचना दर्ज कराई गई है। मामले को प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाते हुए पुलिस अब कलेक्ट्रेट, एसपी दफ्तर और आसपास के पूरे मार्ग पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है, साथ ही साइबर सेल और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अज्ञात शातिर चोरों की सरगर्मी से तलाश में जुट गई है। लेकिन इस वारदात के बाद मऊगंज की आम जनता के बीच तीखी चर्चाएं और आक्रोश व्याप्त है। लोग खुलेआम यह सवाल उठा रहे हैं कि जब जिले के भाग्यविधाता कलेक्टर और कानून व्यवस्था के मुखिया एसपी कार्यालय के सामने खड़े खुद पुलिस के सरकारी वाहन ही सुरक्षित नहीं हैं, तो दूर-दराज के अंचलों और तंग गलियों में रहने वाला सामान्य नागरिक अपनी जान-माल की सुरक्षा को लेकर खाकी पर कैसे भरोसा करे? अब देखना यह है कि अपनी ही नाक के नीचे हुई इस किरकिरी का खुलासा मऊगंज पुलिस कितनी जल्दी करती है और लापरवाही बरतने वाले सुरक्षाकर्मियों पर क्या गाज गिरती है।

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