
मऊगंज: मध्य प्रदेश के नवनिर्मित मऊगंज जिले में विकास के खोखले दावों और प्रशासनिक लापरवाही की एक ऐसी हकीकत सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। यहाँ एक ऐसा गाँव है, जहाँ के लोग जीते जी तो नरक जैसा जीवन जीने को मजबूर हैं ही, लेकिन मरने के बाद भी उनकी लाशों को अंतिम संस्कार के लिए चैन मयस्सर नहीं हो पा रहा है। मामला जनपद पंचायत मऊगंज अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत सीतापुर के अंतर्गत डूडा दुआरी गाँव का है, जहाँ पिछले 8 सालों से श्मशान घाट (मुक्तिधाम) का निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है। प्रशासन की इस घोर अनदेखी से आहत होकर आज बड़ी संख्या में गुस्साए ग्रामीणों ने मऊगंज कलेक्टर को एक सामूहिक शिकायत पत्र और ज्ञापन सौंपकर अपनी पीड़ा बताई और तत्काल कार्रवाई की मांग की है। संबोधित ज्ञापन में ग्रामीणों ने साफ तौर पर कहा है कि डूडा दुआरी गाँव में श्मशान घाट न होने के कारण किसी भी ग्रामीण की मृत्यु होने पर अंतिम संस्कार करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

विशेषकर बरसात के दिनों में खुले आसमान के नीचे अंतिम संस्कार करना पूरी तरह असंभव हो जाता है, जिससे समस्त ग्रामवासियों को भारी मानसिक, व्यावहारिक और भावनात्मक कष्ट उठाना पड़ता है। ज्ञापन में ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए बताया है कि इस गंभीर विषय में स्थानीय पंचायत प्रशासन और संबंधित विभाग को पिछले 8 सालों में कई बार अवगत कराया गया, परंतु इस दिशा में आज तक कोई ठोस और सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई है, जो कि अत्यंत निंदनीय और खेदजनक है। सरकार और प्रशासन की यह बेरुखी साफ दर्शाती है कि आम जनता के जीवन और उनकी बुनियादी जरूरतों के प्रति अधिकारी कितने उदासीन हैं। कलेक्टर को सौंपे गए सामूहिक शिकायत पत्र में ग्रामीणों ने प्रमुख रूप से ग्राम डूडा दुआरी में श्मशान घाट निर्माण के लिए पूर्व में स्वीकृत या लंबित राशि की तत्काल जाँच कराने और जाँच के बाद दोषियों के विरुद्ध कड़ी दंडात्मक कार्रवाई करते हुए श्मशान घाट का निर्माण कार्य तत्काल शुरू कराने की मांग की है।

ज्ञापन में यह भी साफ चेतावनी दी गई है कि यदि इस गंभीर समस्या का त्वरित निराकरण नहीं किया जाता है और श्मशान घाट का निर्माण जल्द शुरू नहीं होता, तो समस्त ग्रामवासी कलेक्टर कार्यालय मऊगंज के सामने अनिश्चितकालीन और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए विवश होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी। ज्ञापन सौंपने वालों में प्रमुख रूप से राकेश कुमार साकेत, आशीष साकेत, रामचरण, उमाशंकर साकेत सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। अब देखना यह है कि मऊगंज कलेक्टर ग्रामीणों की इस जायज और बुनियादी मांग पर कितनी तत्परता दिखाते हैं या अन्नदाता और आम जनता को फिर से आंदोलन का रास्ता चुनना पड़ेगा।












