
मऊगंज: मऊगंज जिले से लेकर रीवा संभाग तक प्रशासनिक व्यवस्था की लाचारी और सुस्ती पर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं, जहां जनता की गाढ़ी कमाई और सरकारी खजाने की लूट पर जिम्मेदार अफसर आंखों पर पट्टी बांधकर बैठे नजर आ रहे हैं। मामला जनपद पंचायत मऊगंज अंतर्गत ग्राम पंचायत भाटी सेंगर का है, जहां 15वें वित्त आयोग, 5वें वित्त आयोग और मनरेगा मद से लगभग 74,90,780 रुपये के भारी-भरकम बजट में हुए कथित घोटाले का जिन्न एक बार फिर बाहर निकल आया है। मऊगंज जनपद सदस्य शेख मुख्तार सिद्दीकी ने सरपंच परवाज भारती और सचिव दीनानाथ द्विवेदी पर सीधा हमला बोलते हुए शासकीय धन की बंदरबांट का सनसनीखेज आरोप लगाया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ग्रामवासियों ने पहली बार 17 फरवरी 2026 को मऊगंज कलेक्टर की जनसुनवाई में 52 लाख से अधिक के फर्जीवाड़े की लिखित शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी जांच के नाम पर केवल फाइलों को दबाया जाता रहा।

अधिकारियों की इसी हीला-हवाली और अनदेखी का नतीजा रहा कि 26 जून 2026 को हुई दूसरी शिकायत तक कथित घोटाले का दायरा बढ़कर लगभग 75 लाख रुपये तक पहुंच गया। जनपद सदस्य शेख मुख्तार सिद्दीकी ने प्रशासनिक अफसरों की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि मऊगंज जिले से लेकर रीवा संभाग तक बैठे आला अधिकारियों का रवैया इतना बेपरवाह हो चुका है कि धरातल पर बिना नाली, चबूतरा, आंगनवाड़ी, पुलिया और खेत-तालाब बने ही कागजों पर लाखों रुपये की फाइलें पास हो गईं और किसी ने झांकना तक मुनासिब नहीं समझा।

यदि पहली ही शिकायत पर समय रहते जांच हो जाती, तो शासकीय धन की इतनी बड़ी कथित डकैती को रोका जा सकता था। अब ग्रामीणों और जनपद सदस्य ने जिला प्रशासन व संभागीय आयुक्त को खुली चेतावनी दी है कि यदि इस 75 लाख के कथित घोटाले की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो पूरे मऊगंज और रीवा संभाग में एक ऐतिहासिक और उग्र जन-आंदोलन खड़ा किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।












