मध्य प्रदेश में दिव्यांगों के संवैधानिक अधिकारों की धज्जियाँ! ‘बाबाजी विश्वनाथ’ बस संचालक ने दिव्यांग कार्ड दिखाने पर भी नहीं दी 50% किराए की छूट, वसूला पूरा किराया; क्या मोहन यादव सरकार की साख सिर्फ कागजों पर है?

चित्रकूट: मध्य प्रदेश में दिव्यांगजनों के साथ हो रहे लगातार अन्याय और शोषण की एक ऐसी शर्मनाक वारदात सामने आई है, जिसने राज्य की मोहन यादव सरकार के ‘सुशासन’ और ‘संवेदनशील प्रशासन’ के तमाम दावों की पोल खोलकर रख दी है। यह घटना साबित करती है कि परिवहन माफियाओं और निजी बस संचालकों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे भारत के संविधान और राज्य सरकार के स्पष्ट आदेशों को भी पैरों तले रौंदने में नहीं हिचक रहे हैं। मामला चित्रकूट से सतना तक की यात्रा से जुड़ा है, जहाँ एक पीड़ित दिव्यांगजन को अपना जायज संवैधानिक हक माँगने पर अपमानित होना पड़ा और उनसे बस ऑपरेटर ने जबरन पूरा किराया वसूल किया। पूरा वाकया सागर जिले के ग्राम रेहली के निवासी पीड़ित दिव्यांगजन **राज मोहमद (42/765)** के साथ घटित हुआ। उन्होंने अपने साथी के साथ **चित्रकूट से सतना** तक की यात्रा ‘बाबाजी विश्वनाथ’ (BABA KASHI VISHWANATH – ‘OM SHAKTI’) ट्रैवल्स की बस संख्या **MP 19 ZK 0770** में की। यात्रा के दौरान, जब उन्होंने नियमानुसार अपना **वैध दिव्यांग प्रमाण पत्र (UDID Card)** बस के कंडेक्टर और संचालक को दिखाया और मध्य प्रदेश सरकार के आदेशानुसार किराए में **50% की छूट** की माँग की, तो बस संचालक ने मानवता और कानून दोनों को ताक पर रख दिया। पीड़ित का आरोप है कि वैध कार्ड दिखाने के बावजूद बस संचालक ने 50% किराया वापस करने से साफ इनकार कर दिया और उनसे दो लोगों का **पूरा किराया ₹200** जबरन वसूल किया गया। यह सीधे तौर पर दिव्यांगजनों के अधिकारों का हनन है। इस शर्मनाक कृत्य को लेकर हैंडीकैप दिव्यांगजन वेलफेयर एसोसिएशन के **प्रदेश सह-सचिव दीपक कुमार गुप्ता** ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि— *”यह कोई सामान्य चोरी नहीं, बल्कि एक दिव्यांग के आत्मसम्मान और उसके संवैधानिक अधिकारों पर डकैती है। एक तरफ मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार दिव्यांगों के कल्याण के ढोल पीटती है, और दूसरी तरफ उनकी नाक के नीचे परिवहन विभाग के आला अधिकारी इन निजी बस संचालकों से साठगांठ करके दिव्यांगों को लुटवा रहे हैं। ‘बाबाजी विश्वनाथ’ ट्रैवल्स के इस कृत्य ने साफ कर दिया है कि उन्हें न तो संविधान का डर है और न ही सरकार का।”* दीपक गुप्ता ने सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा— *”संविधान का **अनुच्छेद 14** समानता का अधिकार देता है, और **अनुच्छेद 21** गरिमापूर्ण जीवन का अधिकार देता है। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत सरकार ने स्पष्ट आदेश जारी किए हैं कि दिव्यांगों को बसों के किराए में 50% की रियायत दी जाए। **परिवहन विभाग का आदेश क्रमांक 1445/1435/2019/3/8 दिनांक 22/07/2019** साफ तौर पर कहता है कि निजी और सरकारी बसों में 50% किराए की छूट अनिवार्य है। तो फिर किस हैसियत से ये बस संचालक पूरा किराया वसूल रहे हैं? क्या सरकार की मंशा सिर्फ कागजों पर आदेश निकालने की है या उसे लागू कराने की भी?” संगठन ने परिवहन मंत्री और मुख्यमंत्री से मांग की है कि इस भ्रामक खबर के विरुद्ध कि सरकार दिव्यांगों के साथ है, ‘बाबाजी विश्वनाथ’ ट्रैवल्स के विरुद्ध **तत्काल एफआईआर (FIR)** दर्ज की जाए, उनकी बस **MP 19 ZK 0770** का **परमिट और लाइसेंस निरस्त** किया जाए और दोषी संचालक को सलाखों के पीछे भेजा जाए। यदि 24 घंटे के भीतर कार्रवाई नहीं हुई, तो प्रदेश भर के दिव्यांग भोपाल में परिवहन विभाग का घेराव करेंगे और जंतर-मंतर पर आमरण अनशन करने पर मजबूर होंगे। अब देखना यह है कि मोहन यादव सरकार अपने इस पीड़ित दिव्यांग भाई को न्याय दिलाती है या परिवहन माफियाओं के आगे घुटने टेक देती है।

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