
शनिवार दोपहर बाद की बारिश ने मऊगंज में तांडव मचा दिया। कुछ घंटे की बरसात ने नगर परिषद की नाकामी को बेनकाब कर दिया। सीधी रोड से लेकर गुगली मेडिकल और मुख्य चौराहे तक हर रास्ता पानी में डूब गया। दुकानें जलमग्न, गलियां दलदल, और घरों के भीतर तक घुसा नालों का गंदा पानी — मऊगंज नगर परिषद की ‘तैयारियों’ का यही हाल है। चौंकाने वाली बात यह रही कि बारिश थमने के कई घंटे बाद भी जलनिकासी के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए। रहवासी मोहल्लों से लेकर बाजारों तक सिर्फ पानी-पानी नजर आया। नाले उफनते रहे और सड़कें बहती रहीं — जैसे कोई नदी बह रही हो।
स्थानीय लोगों ने नगर परिषद और खासकर सीएमओ पर सीधा आरोप लगाया कि हर साल यही हालत होती है लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ ‘औपचारिकता’ होती है। लोगों का कहना है — “सीएमओ महोदय सिर्फ कैमरे के सामने दिखते हैं, लेकिन जमीनी काम शून्य है।” गौर करने वाली बात यह है कि नालों की समय पर सफाई तक नहीं कराई जाती, और जब पानी घरों में घुसता है, तब ‘निरीक्षण’ के नाम पर नेता और अफसर मौके पर पहुंचकर लीपापोती कर चले जाते हैं। गुगली मेडिकल से लेकर मुख्य बाजार चौराहे तक का हाल ऐसा था कि आमजन और व्यापारियों को दुकानें बंद करनी पड़ीं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को कीचड़ और गंदगी में रास्ता तय करना पड़ा।
अब जनता सिर्फ शिकायत नहीं कर रही, बल्कि स्थायी समाधान की मांग पर अड़ गई है।
लोगों ने चेताया है कि यदि जल्द कार्य नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन किया जाएगा।
क्या अब भी नगर परिषद और सीएमओ नींद से जागेंगे या अगली बारिश तक फिर बहाने ही बनाए जाएंगे?













