
मऊगंज। जिले में गौशालाओं की हकीकत प्रशासनिक दावों की पोल खोल रही है। हाल ही में मुख्यमंत्री मोहन यादव के दौरे से पहले कलेक्टर संजय कुमार जैन ने साफ निर्देश दिए थे कि सभी ग्राम पंचायतें गौमाताओं की देखभाल करें और गौशालाओं में पर्याप्त संख्या में गायें मौजूद रहें। लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर बिल्कुल उलटी दिखाई दे रही है।
सूत्रों के मुताबिक, कई गौशालाओं पर हर साल करोड़ों रुपये चारा, पानी और देखभाल के नाम पर खर्च किए जाते हैं, बड़े-बड़े बिल पास होते हैं, लेकिन जब हकीकत जानने रात में कोई मौके पर पहुंचे तो गौशालाएं खाली पाई जाती हैं। जिम्मेदार अधिकारी निरीक्षण के समय सफाई में यही कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं कि गायें चरने बाहर गई हैं, जबकि सच्चाई यह है कि कई गौशालाओं में गायों का अस्तित्व तक नहीं दिखता।
यह स्थिति प्रशासनिक लापरवाही के साथ-साथ भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करती है। ग्राम पंचायत सचिव से लेकर संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों तक, सभी पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद गौमाताओं की स्थिति बदहाल क्यों है? कलेक्टर के आदेशों को नजरअंदाज करना कहीं न कहीं इस बात का सबूत है कि व्यवस्था में गड़बड़ी गहरी है।
लोगों का कहना है कि यदि कलेक्टर संजय कुमार जैन ने इस बार सख्ती नहीं दिखाई तो पूरा मामला फिर फाइलों और कागजों में दबकर रह जाएगा। फिलहाल जिलेभर में गौशालाओं की अव्यवस्था चर्चा का मुख्य विषय बनी हुई है और आमजन प्रशासन से पारदर्शी कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं।













