
प्रदेश में शिक्षा को स्मार्ट और हाईटेक बनाने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएँ चलाई जा रही हैं। क्लासरूम को अत्याधुनिक बनाने के लिए डिजिटल बोर्ड तक लगवाए गए हैं, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध हो सके। मगर अब इन डिजिटल बोर्ड का गलत इस्तेमाल भी सामने आने लगा है। मऊगंज जिले से ताजा मामला सामने आया है, जहाँ शासकीय केदारनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय (पीएम श्री कॉलेज) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस वीडियो में कॉलेज के क्लासरूम में लगे डिजिटल बोर्ड पर भोजपुरी गाना चलते हुए दिखाई दे रहा है। गाने की फूहड़ता के कारण कक्षा में बैठी छात्राएं असहज महसूस करने लगीं और कई छात्राओं ने शर्मिंदगी के कारण सिर झुका लिया।
वीडियो सामने आते ही जिले के शिक्षा महकमे में हड़कंप मच गया। मऊगंज कलेक्टर संजय जैन ने इस पर संज्ञान लेते हुए कहा कि वायरल वीडियो की जांच के निर्देश दिए गए हैं और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी। वहीं उच्च शिक्षा विभाग के अतिरिक्त संचालक आरपी सिंह ने बताया कि वायरल वीडियो की गहन पड़ताल की गई और यह मऊगंज के शासकीय केदारनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय का ही पाया गया। प्राचार्य को निर्देश दिए गए हैं कि घटना के संबंध में जो भी संलग्न हैं, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही कर विभाग को रिपोर्ट भेजी जाए। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि भविष्य में किसी भी महाविद्यालय से इस तरह का कृत्य दोहराया गया तो कठोर कदम उठाए जाएंगे।
गौरतलब है कि हाल ही में मध्यप्रदेश के 55 महाविद्यालयों को पीएम श्री कॉलेज का दर्जा प्रदान किया गया है, जिनमें रीवा संभाग के 9 कॉलेज शामिल हैं। इन संस्थानों को स्मार्ट बनाने के लिए ही क्लासरूम में डिजिटल बोर्ड लगाए गए थे। मगर अब इन बोर्ड का इस्तेमाल शिक्षा के बजाय यूट्यूब से गाने चलाने में किया जाने लगा है, जो सरकार की मंशा और शिक्षा की गंभीरता पर सवाल खड़े करता है।
यह पहली बार नहीं है जब कॉलेजों से ऐसे वीडियो वायरल हुए हों। इससे पहले हनुमना के एक कॉलेज से छात्रों का वीडियो सामने आया था, जिसमें वे क्लासरूम में बर्थडे पार्टी मनाते हुए बीयर उड़ाते नजर आए थे। उसी तरह रीवा के ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय से एक छात्रा का डांस रील बनाते हुए वीडियो भी वायरल हो चुका है। बार-बार कॉलेजों से इस तरह के वीडियो सामने आना शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है और यह दर्शाता है कि शिक्षा के मंदिरों में अनुशासन और मूल उद्देश्य कहीं पीछे छूटते जा रहे हैं।













