
मऊगंज, मध्यप्रदेश। जिले के मऊगंज, हनुमना, नईगढ़ी, देवतालाब, सीतापुर और ग्रामीण अंचलों में संचालित सैकड़ों निजी स्कूलों द्वारा परिवहन व्यवस्था में भारी लापरवाही बरती जा रही है। इन विद्यालयों में नन्हें-मुन्ने बच्चों को स्कूल लाने और ले जाने के लिए जो वाहन प्रयोग में लाए जा रहे हैं, वे शासन की गाइडलाइन की खुलेआम धज्जियाँ उड़ा रहे हैं।
ना तो वाहनों का रंग नियमानुसार “पीला” किया गया है, ना ही उन पर “सावधान! इसमें बच्चे हैं” जैसे सुरक्षा संदेश या स्कूल का नाम अंकित किया गया है। न ही रेडियम की पट्टियां, न ही फर्स्ट एड बॉक्स और ना ही किसी प्रकार का छोटा अग्निशमन यंत्र – यानी बच्चों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह लापरवाही बरती जा रही है।
स्थिति और भी चिंताजनक तब हो जाती है जब यह देखा जाता है कि इन वाहनों में बच्चों की क्षमता से दो से तीन गुना ज्यादा बच्चों कोぎठ्ठे की तरह ठूंस कर बैठा दिया जाता है। इससे मासूमों को ऑक्सीजन की भी ठीक से सुविधा नहीं मिल पाती। दम घुटने की शिकायतें और बच्चों की बेचैनी आए दिन परिजनों और आम लोगों द्वारा देखी जा रही है।
स्थानीय नागरिकों ने इसे बच्चों की जान के साथ जानबूझकर किया जा रहा खिलवाड़ करार दिया है। प्रशासन से सवाल किया जा रहा है कि क्या कोई बड़ा हादसा होने के बाद ही नींद खुलेगी?
इस पूरे मामले को गंभीरता से उठाते हुए स्थानीय मीडिया द्वारा जिला कलेक्टर मऊगंज श्री संजय कुमार जैन से मांग की गई है कि जिले के सभी प्राइवेट स्कूलों में लगे वाहनों की जांच करवाई जाए और जो वाहन शासन की गाइडलाइन के अनुरूप नहीं हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित किया जाए। साथ ही स्कूल संचालकों को बच्चों की सुरक्षा को लेकर सख्त निर्देश दिए जाएं, ताकि भविष्य में किसी मासूम की जान खतरे में न पड़े।













