
रीवा जिले की शिक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। जनपद पंचायत रायपुर कर्चुलियान अंतर्गत ग्राम लेडुआ स्थित प्राथमिक विद्यालय में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार यह विद्यालय अवधि समाप्त होने से पहले ही बंद कर दिया जाता है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों में स्पष्ट देखा जा सकता है कि स्कूल दोपहर 3:30 बजे के आसपास ही पूरी तरह बंद हो जाता है और शिक्षक परिसर छोड़कर चले जाते हैं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि यह स्थिति कोई एक दिन की नहीं है, बल्कि लंबे समय से यही हाल बना हुआ है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और कोई सुनवाई नहीं हो रही। एक अभिभावक ने बताया, “हमारे बच्चे स्कूल जाते हैं, लेकिन वहां पढ़ाई कम और ताले अधिक मिलते हैं। सरकार मुफ्त में किताबें और भोजन दे रही है, लेकिन यदि शिक्षक समय पर स्कूल ही न आएं तो पढ़ाई का क्या होगा?”
सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल:
यह मामला सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं है। सवाल यह उठता है कि आखिर क्यों सरकारी शिक्षक समय का पालन नहीं करते? क्या यही है ‘शिक्षा का अधिकार’? सरकारी स्कूलों में समय की पाबंदी और शिक्षा की गुणवत्ता दोनों ही बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं।
रीवा जैसे शिक्षित माने जाने वाले जिले में अगर ऐसे हालात हैं, तो फिर दूरदराज़ के ग्रामीण इलाकों में स्थिति कितनी भयावह होगी, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।
शिक्षा विभाग की भूमिका पर उठे सवाल:
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि शिक्षा विभाग इस पूरे मामले पर क्या कार्रवाई करेगा? क्या संबंधित शिक्षक पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी या यह मामला भी बाकी मामलों की तरह दबा दिया जाएगा?
क्या होनी चाहिए कार्रवाई?
-
स्कूल में नियमित निरीक्षण की व्यवस्था होनी चाहिए।
-
समय से पहले स्कूल बंद करने वाले शिक्षकों पर सख्त अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएं।
-
ग्रामीण स्कूलों में संसाधनों की पूर्ति के साथ-साथ शिक्षक उपस्थिति और गुणवत्ता पर सख्त निगरानी रखी जाए।
सरकार से अपेक्षा:
सरकार को यह समझना होगा कि गांव के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का पूरा अधिकार है। शिक्षकों की गैर-ज़िम्मेदाराना हरकतें बच्चों के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ हैं। यदि इन मुद्दों पर तत्काल ध्यान नहीं दिया गया, तो शिक्षा के स्तर में गिरावट और भी तेज़ हो सकती है।













