
भोपाल। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने विधानसभा भवन स्थित अपने कक्ष में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर गहन समीक्षा बैठक की। इस बैठक में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा संदीप यादव, आयुक्त स्वास्थ्य तरुण राठी, संचालक प्रोजेक्ट नीरज कुमार सिंह, एमडी एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
उपमुख्यमंत्री शुक्ल ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि “निर्माणाधीन स्वास्थ्य परियोजनाएं निर्धारित समयसीमा में पूर्ण की जाएं और जो कार्य पूरे हो चुके हैं, उनमें आमजन को त्वरित सेवाएं प्रदान की जाएं।” उन्होंने दो टूक कहा कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है – नागरिकों को सस्ती, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं देना। इसके लिए विभागीय समन्वय और योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन आवश्यक है।
बैठक में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM), विकास परियोजनाओं, भवन निर्माण, संस्थागत स्थापना एवं अस्पताल प्रशासन से संबंधित 369 प्रस्तावों की समीक्षा की गई। उपमुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि इन प्रस्तावों में से 198 का परीक्षण किया जा चुका है, जिनमें से 113 प्रस्ताव योग्य पाए गए हैं। ये प्रस्ताव उपस्वास्थ्य केंद्र (SHC), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और जिला अस्पतालों से संबंधित हैं। शेष प्रस्तावों का परीक्षण शीघ्र पूर्ण कर, पात्र प्रस्तावों पर तुरंत कार्यवाही के निर्देश भी दिए गए।
उन्होंने 15वें वित्त आयोग के अंतर्गत चल रही योजनाओं और निर्माण कार्यों को तय समयसीमा में पूर्ण करने पर विशेष बल दिया, ताकि आवंटित राशि का उपयोग प्रभावी रूप से हो और जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
चिकित्सकीय स्टाफ की उपस्थिति की समीक्षा करते हुए उपमुख्यमंत्री ने बांड पोस्टिंग वाले डॉक्टरों को नियमानुसार सेवाएं देने के निर्देश दिए और इस प्रक्रिया की निगरानी को भी जरूरी बताया।
इसके अलावा, उन्होंने लोक सेवा आयोग और ईएसबी के माध्यम से चल रही नियुक्ति प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए इसे अक्टूबर 2025 तक पूर्ण करने को कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियुक्तियों में कोई ढिलाई न हो, इसके लिए अधिकारियों को सतत निगरानी रखनी होगी।
बैठक में एमआरआई, सीटी स्कैन जैसी महंगी तकनीकी सेवाओं के संचालन में टेक्नीशियन की कमी को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने कहा कि जब तक नियमित नियुक्तियाँ नहीं हो जातीं, तब तक आउटसोर्सिंग के माध्यम से टेक्नीशियन की व्यवस्था की जाए, ताकि महंगे उपकरण निष्क्रिय न रहें और मरीजों को समय पर उपचार मिल सके।













