11 साल की उपेक्षा: मऊगंज की मौहरिया शाला दो जर्जर कमरों में सिमटी, 70 बच्चों का भविष्य अधर में

मऊगंज, मध्यप्रदेश। शिक्षा का अधिकार तो सबको है, लेकिन मऊगंज जिले के नईगढ़ी विकासखंड अंतर्गत प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला मौहरिया में जो हालात हैं, वो देश की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को आइना दिखाते हैं। यहां शिक्षा का मंदिर दो जर्जर कमरों में सिमट कर रह गया है, जहां पांच शिक्षक 70 से अधिक छात्र-छात्राओं को पढ़ा रहे हैं। यह हालात न सिर्फ चौंकाने वाले हैं, बल्कि बेहद चिंताजनक भी। वर्ष 2014 में इस विद्यालय को प्राथमिक से माध्यमिक में उन्नत तो कर दिया गया, लेकिन आज 11 वर्ष बीत जाने के बावजूद भवन निर्माण के नाम पर एक ईंट तक नहीं जुड़ी। बैठने के लिए पर्याप्त कक्ष नहीं, छत से गिरता प्लास्टर, और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा भी नदारद। यह हालात विकास की जमीन पर एक बदनुमा धब्बा हैं।

विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक ने बताया कि यदि सभी बच्चे एक साथ विद्यालय आ जाएं तो उनके बैठने तक की व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कई बार वरिष्ठ अधिकारियों को मौखिक व लिखित रूप से सूचना दी, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। छात्र-छात्राओं की मानें तो विद्यालय परिसर में शौचालय तक नहीं है, और वे पास में ही बने तालाब का सहारा लेते हैं। ऐसे में किसी दिन यदि कोई हादसा हो गया तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? वहीं, स्कूल के भीतर बने किचन शेड से लगातार प्लास्टर गिर रहा है, जिससे रसोइयों की जान पर भी खतरा बना हुआ है।

अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहा है? क्या किसी छात्र की जान चली जाए या किसी रसोई का जीवन खतरे में पड़ जाए, तब ही सरकार और जिम्मेदार अधिकारी नींद से जागेंगे? शिक्षा विभाग, जनप्रतिनिधि और जिला प्रशासन को अब हर हाल में इस समस्या का स्थायी समाधान निकालना चाहिए। यह सिर्फ एक विद्यालय की बात नहीं, यह उन 70 बच्चों के भविष्य की लड़ाई है जिनकी उम्मीदें इन जर्जर दीवारों से बंधी हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

यह भी पढ़ें