
रीवा संभाग में बीते छह महीने से जारी नशामुक्ति अभियान को उपमुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने बड़ी सफलता बताया है। उन्होंने नशे के खिलाफ इस अभियान की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को दो टूक शब्दों में निर्देश दिए—“नशे के सौदागरों पर कड़ी कार्रवाई करें, और नशीली सामग्री के तंत्र को जड़ से खत्म करें।” रीवा सर्किट हाउस में हुई समीक्षा बैठक में श्री शुक्ल ने स्पष्ट किया कि नशा सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे समाज और भविष्य को तबाह करता है। उन्होंने कहा कि “विंध्य क्षेत्र में हो रहा विकास तभी सार्थक होगा, जब हमारी भावी पीढ़ी नशे से दूर रहे।” उपमुख्यमंत्री ने विशेष रूप से कोरेक्स और अन्य नशीले कफ सिरप की तस्करी पर चिंता जताई। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे पदार्थों के निर्माण से लेकर बिक्री तक की पूरी सप्लाई चेन पर निगरानी रखी जाए। साथ ही, केवल अपराधियों पर कार्रवाई ही नहीं, बल्कि नशा पीड़ितों के पुनर्वास की व्यवस्था भी की जाए। उन्होंने समाज के हर वर्ग से इस मुहिम में सहयोग देने की अपील की।
इस दौरान रीवा संभाग के पुलिस महानिरीक्षक श्री गौरव राजपूत ने नशे के खिलाफ की जा रही कार्रवाई की रिपोर्ट पेश की। उन्होंने बताया कि:
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पिछले 6 माह में 2 करोड़ रुपए से अधिक की नशीली सामग्री जप्त की गई है।
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एक दिन में ही 22 लाख की अवैध शराब जब्त कर 1017 आरोपियों की गिरफ्तारी की गई।
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रीवा जिले में 2023 में 176, 2024 में 162, और 2025 में अब तक 129 आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं।
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पशु तस्करी में लिप्त 32 अपराधियों को जेल भेजा गया और 2000 से अधिक पशुओं को छुड़ाकर गौशालाओं में भेजा गया है।
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250 से अधिक गुमशुदा व्यक्तियों को बरामद कर परिजनों को सौंपा गया।
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रात्रिकालीन गश्त और फरार वारंटियों पर भी विशेष फोकस किया जा रहा है।
बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती नीता कोल सहित कई विभागीय अधिकारी भी उपस्थित रहे। उपमुख्यमंत्री श्री शुक्ल के अनुसार, नशे के खिलाफ यह मुहिम तभी सफल होगी जब समाज, सरकार और पुलिस एकजुट होकर इसे जड़ से समाप्त करने का संकल्प लें।













