
मऊगंज। मंगलवार को मऊगंज कलेक्ट्रेट कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में आम जनता का आक्रोश एक बार फिर प्रशासन के सामने फूट पड़ा। संयुक्त कलेक्टर राजेश मेहता की अध्यक्षता में हुई इस जनसुनवाई में कुल 46 आवेदन प्रस्तुत किए गए, जिनमें से दो गंभीर शिकायतें प्रशासन के भ्रष्ट तंत्र की पोल खोलने वाली रहीं।
प्रधानमंत्री आवास में रिश्वत की मांग!
नईगढ़ी जनपद के ग्राम रामपुर निवासी सोने लाल साकेत ने पंचायत सचिव संतोष साकेत पर गंभीर आरोप लगाए। शिकायतकर्ता ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली किस्त से उसने छत तक मकान तैयार कर लिया है, लेकिन दूसरी किस्त जारी करने के एवज में पंचायत सचिव ने ₹50,000 की रिश्वत की मांग की है। सोने लाल ने यह शिकायत 16 जून को मुख्य कार्यपालन अधिकारी से भी की थी। उनका कहना है कि यदि समय पर किस्त नहीं मिली तो निर्माण कार्य ठप हो जाएगा, और सरकारी योजना की सारी मेहनत बेकार चली जाएगी।

तहसील लिपिक पर ‘अपराधियों की मदद’ का आरोप
एक अन्य गंभीर शिकायत मऊगंज वार्ड क्रमांक 2 निवासी सुमन शुक्ला ने की। उन्होंने तहसील लिपिक बादल शुक्ला पर अपराधियों को अवैध रूप से रिहा कराने का आरोप लगाया। सुमन शुक्ला के अनुसार, 28 मार्च को पुलिस ने राकेश, रमानिवास और अंजनी को धारा 151 के तहत गिरफ्तार किया था। इन पर सुमन के बच्चों के साथ मारपीट और हमला करने के आरोप थे। FIR दर्ज होने के बावजूद, सुमन का कहना है कि तहसील लिपिक ने इन आरोपियों की पक्षपातपूर्वक रिहाई करवाई, जो न्यायिक व्यवस्था के साथ सीधी छेड़छाड़ है। उन्होंने लिपिक के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासन पर सवाल
जनसुनवाई में जिस प्रकार के भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं, वह यह दिखाता है कि नीचले स्तर से लेकर दफ्तरों तक भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हो चुकी हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन सिर्फ सुनता है या वाकई दोषियों पर कार्रवाई भी करता है।













