पुलिस कहती है खतरा नहीं, फिर विधायक भोपाल में क्यों छिपे? मऊगंज प्रशासन जवाब दे!

मऊगंज | मऊगंज की गलियां और वहां की जनता पिछले 40 दिनों से एक ही सवाल पूछ रही थी— “हमारे विधायक जी कहां हैं?” आज उस रहस्यमयी पर्दे के पीछे की हकीकत सामने आ गई है। मऊगंज से भाजपा विधायक प्रदीप पटेल, जो 4 जनवरी 2026 से सार्वजनिक रूप से ‘लापता’ थे, वे मऊगंज से करीब 600 किलोमीटर दूर भोपाल के एमएलए रेस्ट हाउस (सरकारी आवास) में मिले हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि विधायक ने खुद को वहां किसी अज्ञात भय के चलते ‘कैद’ कर रखा है।

जमीन विवाद से शुरू हुआ ‘लापता’ होने का खेल

इस पूरी पटकथा की शुरुआत 4 जनवरी को मऊगंज के एक विवादित जमीन मामले से हुई थी। वहां एक धरने के दौरान उग्र भीड़ ने विधायक का विरोध किया और स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पुलिस को विधायक को सुरक्षित बाहर निकालना पड़ा। इसके बाद विधायक का एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें वे अपने बेटे को घर का दरवाजा न खोलने और असुरक्षित महसूस करने की बात कह रहे थे। विधायक का आरोप है कि उन्हें ‘मूसा गैंग’ से जान का खतरा है और कुछ लोग उन्हें जिंदा जलाना चाहते हैं।

प्रशासनिक विरोधाभास: पुलिस बोली ‘गैंग’ नहीं, मंत्री बोले ‘तीर्थ यात्रा’

इस मामले ने तब और भी नाटकीय मोड़ ले लिया जब मऊगंज एसपी दिलीप सिंह सोनी ने दो टूक शब्दों में कह दिया कि जिले में ‘मूसा गैंग’ जैसी किसी गैंग का कोई वजूद ही नहीं है। वहीं, राज्य मंत्री राधा सिंह ने विधायक के गायब होने को ‘तीर्थ दर्शन’ बताया, तो सांसद जनार्दन मिश्रा ने इसे ‘मानसिक शांति के लिए अवकाश’ करार दिया। सवाल यह है कि अगर पुलिस कह रही है कि कोई खतरा नहीं है, तो फिर एक सत्ताधारी विधायक अपनी ही सरकार में इतना डरा हुआ क्यों है कि उसे भोपाल में छिपना पड़ा?

भ्रष्टाचार और माफियाराज पर कड़े सवाल

विधायक प्रदीप पटेल का इस तरह अंडरग्राउंड होना मऊगंज की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तंत्र पर बड़ा तमाचा है। क्या एक विधायक को सुरक्षित रखने में मऊगंज पुलिस और प्रशासन नाकाम रहा? या फिर यह मऊगंज में जड़ें जमा चुके भू-माफियाओं और प्रशासनिक अधिकारियों की मिलीभगत का नतीजा है? जिस विधायक ने नए जिले के लिए संघर्ष किया, आज वही अपने ही क्षेत्र से दूर रहने को मजबूर है।

अब जब विधायक भोपाल में मिल गए हैं, तो मऊगंज की जनता पूछ रही है कि क्या ‘माननीय’ अब सिर्फ सोशल मीडिया और वीडियो कॉल के जरिए ही क्षेत्र की समस्याओं का हल करेंगे? या फिर प्रशासन उन ‘अदृश्य ताकतों’ पर कार्रवाई करेगा जिनसे विधायक जी खौफजदा हैं?

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