श्रम संहिताओं के विरोध में रीवा में ट्रेड यूनियनों का जोरदार प्रदर्शन

रीवा में केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई चार श्रम संहिताओं के विरोध में संयुक्त ट्रेड यूनियन मंच के आह्वान पर मंगलवार को केंद्रीय श्रमिक संगठनों ने श्रम पदाधिकारी कार्यालय के सामने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद महामहिम राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए श्रमिक संगठनों ने श्रम संहिताओं को पूरी तरह रद्द करने की मांग की।

संयुक्त ट्रेड यूनियनों का कहना है कि नई श्रम संहिताएं मजदूर विरोधी हैं और इनके लागू होने से संगठित एवं असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के अधिकारों पर सीधा असर पड़ेगा। ज्ञापन में सभी प्रकार के ठेकाकरण, आउटसोर्सिंग और फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट को समाप्त करने की मांग उठाई गई। साथ ही योजनाकर्मी, ठेका मजदूर, कृषि श्रमिक और असंगठित क्षेत्र के कामगारों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की आवश्यकता बताई गई।

श्रमिक संगठनों ने राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपये प्रतिमाह तय करने और सभी श्रमिकों के लिए 10 हजार रुपये मासिक पेंशन लागू करने की मांग की। इसके साथ ही रक्षा, रेलवे, बैंक, बीमा, शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, कोयला, परिवहन, बंदरगाह, तेल, भेल और स्टील जैसे सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग भी ज्ञापन में प्रमुखता से शामिल रही।

प्रदर्शन के दौरान प्रीपेड स्मार्ट मीटर योजना को तत्काल बंद करने, किसानों को खेती के लिए मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने, घरेलू उपभोक्ताओं को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने और सभी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल करने की मांग भी उठाई गई।

श्रमिक नेताओं ने कहा कि देशभर में किसान और मजदूर लगातार आंदोलनों के माध्यम से अपनी आवाज उठा रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रही है। श्रम संहिताओं के लागू होने से न्यूनतम वेतन, सुरक्षित रोजगार, काम के घंटे, सामाजिक सुरक्षा और ट्रेड यूनियन बनाने जैसे बुनियादी अधिकार कमजोर होंगे, जिससे बेरोजगारी और शोषण बढ़ने की आशंका है।

संयुक्त ट्रेड यूनियनों ने सरकार से मांग की कि मजदूरों के ट्रेड यूनियन बनाने के मौलिक अधिकारों की रक्षा की जाए और श्रमिक हितों के खिलाफ बनाए गए कानूनों को वापस लिया जाए।

इस प्रदर्शन में सीटू के जिलाध्यक्ष गिरिजेश सिंह सेंगर, महासचिव सौरभ मिश्रा, अमित सोहगौरा, विनयशंकर मुफलिश, इंटक के जिलाध्यक्ष जीपी त्रिपाठी, विद्याशंकर तिवारी, यादवेन्द्र शुक्ला, रमेश सोनी, बीरेन्द्र सिंह, एम.आर. यूनियन के गौरव रणदेव, संजय तिवारी, वृजेश सिंह, किसान नेता रामजीत सिंह, जेआरसी से मनोज मिश्रा सहित अविनाश शुक्ला, मनीष गुप्ता, विकास तिवारी, आशीष अग्निहोत्री, योगेन्द्र सिंह और सुमित मघलानी समेत बड़ी संख्या में श्रमिक और संगठन पदाधिकारी मौजूद रहे।

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