दिव्यांगों के स्वाभिमान प्रदर्शन को मिला विधायक जयवर्धन सिंह का समर्थन, विधानसभा में उठेगी आवाज

गुना। 20 जुलाई से प्रारंभ हुआ दिव्यांग स्वाभिमान प्रदर्शन अब जनप्रतिनिधियों की संवेदनशीलता की कसौटी पर खरा उतरता नजर आ रहा है। गुना जिले में चल रहे इस शांतिपूर्ण और गरिमामय आंदोलन का आज छठवां दिन रहा, जहां दिव्यांग जन अपनी न्यायोचित मांगों को लेकर राघौगढ़ विधायक श्री जयवर्धन सिंह के निवास पर पहुँचे और तीन ज्ञापन सौंपे।

यह प्रदर्शन केवल नारों और मांगपत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें संवाद, सहभोज और स्वाभिमान की भावना प्रमुखता से झलक रही है। दिव्यांगों ने विधायक को मुख्यमंत्री, स्वयं विधायक और नेता प्रतिपक्ष के नाम तीन अलग-अलग ज्ञापन सौंपे। ज्ञापन में पेंशन राशि ₹600 से बढ़ाकर ₹5000 करने, दिव्यांग आयोग के गठन, नगरीय निकायों व पंचायतों में आरक्षण और स्वरोजगार हेतु ₹10 लाख तक का ऋण दिलवाने जैसी महत्वपूर्ण मांगें शामिल रहीं।

इस दौरान राघौगढ़ विधायक जयवर्धन सिंह ने दिव्यांगों की बात न केवल गहनता से सुनी, बल्कि यह भरोसा भी दिलाया कि उनकी सभी समस्याएं पूरी तरह जायज हैं। उन्होंने कहा कि दिव्यांगों की मांगों को वे विधानसभा में उठाएंगे और इसके लिए स्थगन प्रस्ताव व ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाने का भी आश्वासन दिया। उन्होंने जानकारी दी कि दिव्यांग जनों से जुड़े कई प्रश्न वे पहले ही विधानमंडल में लगा चुके हैं, जिनके उत्तर 25 जुलाई को आने वाले हैं।

विधायक ने यह भी स्पष्ट किया कि वे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक दिव्यांगों की आवाज पहुँचाएंगे और जिला स्तर की समस्याओं के समाधान हेतु कलेक्टर गुना से बात करेंगे। ज्ञापन में स्थानीय स्तर की समस्याओं जैसे – बस किराए में रियायत, आवास की सुविधा और शासकीय दुकानों की नीलामी में आरक्षण पर भी चर्चा की गई।

जयवर्धन सिंह ने दिव्यांगों के साथ भोजन कर मानवीय संवेदना और सहभागिता का परिचय दिया। उन्होंने भावुक दिव्यांगों को आश्वस्त करते हुए कहा – “मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूं। तुम्हारी लड़ाई अब मेरी भी लड़ाई है।”

दिव्यांग स्वाभिमान प्रदर्शन का उद्देश्य स्पष्ट है – वे चाहते हैं कि 28 जुलाई 2025 से आरंभ हो रहे विधानसभा सत्र में उनकी मांगें सदन में लायी जाएं और उस पर सकारात्मक कार्यवाही हो। यह आंदोलन सरकार से टकराव नहीं बल्कि अधिकार और आत्मसम्मान की मांग है।

इस ऐतिहासिक प्रदर्शन में जिले भर से सैकड़ों दिव्यांग शामिल हैं, जो सामाजिक सहभागिता और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूकता का उदाहरण बन रहे हैं।

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