हनुमना से निकलकर लोकसेवा आयोग की ऊँचाइयों तक: अमर नाथ का सफर बना प्रेरणा की मिसाल

हनुमना, मध्य प्रदेश के दूरस्थ अंचल हनुमना से निकलकर अमर नाथ ने वो कर दिखाया है जो आज हजारों युवाओं के लिए एक प्रेरणा बन चुका है। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित परीक्षा में उन्होंने प्राचार्य ग्रेड-1 (तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार विभाग) पद पर चयनित होकर राज्य में आठवीं रैंक और अपने वर्ग में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। यह सफलता मात्र एक व्यक्तिगत विजय नहीं है, बल्कि पूरे विंध्य अंचल की उम्मीदों की जीत है, कटकी विधानसभा के सेमरिया गांव के मूल निवासी अमर नाथ का जीवन संघर्षों और संकल्पों से भरा रहा है। पिता श्री रामदयाल साकेत के 2009 में निधन के बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी बड़े भाई बैजनाथ साकेत ने अपने कंधों पर ली, और वहीं से शुरू हुआ यह संघर्षों का सफर, जो आज सफलता के शिखर तक पहुंचा है। उनकी माता श्रीमती कमला बती की आंखों में आज वर्षों की तपस्या और आशाओं का उजाला साफ झलकता है। शिक्षा की बात करें तो अमर नाथ ने ज्ञानोदय आवासीय विद्यालय से स्कूली शिक्षा पूर्ण की और फिर अलीगढ़ से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक किया। 2017 में व्यापम की परीक्षा के माध्यम से प्रशिक्षण अधिकारी के पद पर चयनित हुए और वर्तमान में वे आई.टी.आई हनुमना में प्रभारी प्राचार्य के रूप में पदस्थ हैं। उनकी इस सफलता पर जहां पूरा गांव जश्न मना रहा है, वहीं हनुमना आई.टी.आई के स्टाफ और छात्रों में भी गौरव की लहर दौड़ गई है। अमर नाथ का चयन केवल एक पद नहीं, बल्कि उस मेहनत और जज्बे की कहानी है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ा सपना देखने की हिम्मत करता है। बधाइयों का तांता लगना स्वाभाविक था – विंध्य जनसंघ के संस्थापक और लोकतंत्र सेनानी सरयू प्रसाद वैद्य, प्राचार्य उत्कृष्ट विद्यालय अर्जुन उपाध्याय, भाजपा युवा मोर्चा हनुमना मंडल अध्यक्ष अंकित कुमार मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार संपत्तिदास गुप्ता, सरोज गुप्ता, राजेश शुक्ला, उमेश मिश्रा, श्यामबाबू गुप्त, टिंकल गुप्त, आनंद मिश्रा, दीपक सिंह गहरवार, रूद्र प्रताप सिंह, अमृतलाल प्रजापति सहित अनेकों गणमान्य नागरिकों ने शुभकामनाएं दी हैं और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है। लेकिन सवाल यह भी है: जब गांवों से निकलकर युवाओं में इतनी प्रतिभा और क्षमता है, तो क्या सिस्टम उन्हें बराबर मंच दे पा रहा है? क्या हर अमर नाथ को इतनी मेहनत करनी ही पड़ेगी, जो शहरी संसाधनों के बिना दोहरी लड़ाई लड़ रहे हैं – एक परीक्षा से और एक व्यवस्था से? अमर नाथ की इस कामयाबी के साथ एक उम्मीद भी जुड़ी है – कि ऐसे उदाहरणों से व्यवस्था, समाज और नीति निर्माता सीखें और गांवों में प्रतिभा की पहचान के लिए बेहतर मंच तैयार करें। अमर नाथ केवल एक नाम नहीं, बल्कि आज के युवाओं की हिम्मत और संघर्ष का प्रतीक बन चुके हैं।

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