
रीवा, हेमू कलाणी चौक बुधवार की रात देशभक्ति के रंग में डूबा नजर आया, जब ‘हिन्दू धर्म परिषद युवा शाखा’ और ‘रिदम म्युजिकल ग्रुप’ के संयुक्त प्रयास से “जश्न-ए-तिरंगा” का आयोजन किया गया। यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि राष्ट्र के वीरों को समर्पित भावनाओं की वो लहर थी जिसने सैकड़ों दिलों को झकझोर कर रख दिया।शाम होते-होते चौक पर एक क्रांतिकारी दृश्य सामने था। मशालों की अग्नि जब अंधकार चीरती हुई आगे बढ़ी, और ‘वंदे मातरम्’ की गूंज के साथ राष्ट्रीय ध्वज लहराया गया, तो ऐसा प्रतीत हुआ मानो समूचा रीवा एक साथ देश के लिए गर्व और गौरव से भर गया हो। यह कोई साधारण सांस्कृतिक संध्या नहीं थी, बल्कि “ऑपरेशन सिन्दूर” के जाबांज सेना नायकों के स्वागत में देश का नतमस्तक होना था। कार्यक्रम की शुरुआत ही इतनी जोशीली थी कि उपस्थित भीड़ स्वतः ही भारत माता की जयघोष करने लगी। रिदम म्युजिकल ग्रुप के कलाकारों ने जब एक के बाद एक देशभक्ति से सराबोर तराने प्रस्तुत किए तो पूरा चौक मानो सैनिक छावनी में बदल गया—जहां हर नागरिक एक सिपाही और हर गीत एक गोली बन चुका था। इस देशभक्ति के महासंग्राम को दिशा दी हिन्दू धर्म परिषद के संस्थापक नारायण डिगवाननी, युवा शाखा के अध्यक्ष उमेश कुशवाहा और रिदम ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. विनोद तिवारी ने। मंच संचालन की बागडोर संभाल रहे अवनीश शर्मा ने ऐसे जोश में संचालन किया कि हर थोड़ी देर में पूरा मैदान “भारत माता की जय” से गूंज उठता रहा। संयोजक सुमित मांजवानी और वरिष्ठ अध्यक्ष डॉ. प्रवीर चंद दुबे ने न सिर्फ व्यवस्था को संभाला, बल्कि हर आगंतुक का दिल से स्वागत भी किया। डॉ. सी.बी. शुक्ला (पूर्व संचालक, संजय गांधी अस्पताल) ने अपने उद्बोधन में आतंकवाद के खिलाफ एकजुट राष्ट्र की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं वरिष्ठ संरक्षक डी.पी. सिंह परिहार ने स्पष्ट घोषणा की कि ‘ऑपरेशन सिन्दूर’ केवल एक अभियान नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों को समर्पित संकल्प है। कार्यक्रम में मानस मंडल के उपाध्यक्ष पियूष त्रिवेदी, ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय मोहन तिवारी, डॉ. विकास श्रीवास्तव, अवधेश श्रीवास्तव, नागेन्द्र मिश्रा मणी, हशमत रीवानी, कमल किशोर मिश्रा कमल, अमित द्विवेदी जैसे नामचीन व्यक्तियों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। रिदम ग्रुप के कलाकारों ने जैसे-तैसे मंच नहीं संभाला, उन्होंने मंच को रणभूमि में बदल दिया—जहां हर प्रस्तुति एक प्रहार थी, और हर स्वर में तिरंगे की लहर थी। डॉ. रिचा सिंह, अनिल शुक्ला, श्याम गंगवानी, नीलम गुप्ता, रश्मी द्विवेदी, रोशनी सोनी, रीता तिवारी, अर्चना शुक्ला, मानसी तिवारी और सुलेखा पटेल की प्रस्तुतियों ने जनता को बार-बार तालियों पर मजबूर किया।
यह सिर्फ जश्न नहीं था, यह एक संदेश था—कि जब तिरंगा लहराता है, तो देश का हर कोना जागता है, हर दिल धड़कता है और हर आंख सिर्फ एक सपना देखती है—’एक महान, सशक्त और अखंड भारत’ का













