
रीवा शहर के खैरा नई बस्ती इलाके में शुक्रवार की शाम वह तमाम हदें टूट गईं, जिनके सहारे आम नागरिक अपने हक और सुरक्षा की उम्मीद करता है। एक सूने मकान में जबरन घुसकर सामान बाहर फेंकने और 15 लाख की चोरी के आरोप ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। घटनास्थल पर न सिर्फ दो पक्षों के बीच तीखा टकराव हुआ, बल्कि कानून और व्यवस्था पर भी कई बड़े सवाल खड़े हो गए।
कार में आए दबंग, ताला तोड़ अंदर घुसे
शाम करीब 5 बजे एक स्कॉर्पियो गाड़ी वहां आकर रुकती है। उसमें सवार करीब आधा दर्जन लोग उतरते हैं और सीधे बंद पड़े मकान का ताला तोड़ देते हैं। चश्मदीदों के अनुसार, इन लोगों ने घर के अंदर घुसकर सामान को बाहर फेंकना शुरू कर दिया। यह पूरा घटनाक्रम सिर्फ चोरी या जबरन कब्जे का मामला नहीं था, यह शक्ति प्रदर्शन था – कानून को खुली चुनौती देने का।
सूचना के बाद भी पुलिस ‘गहरी नींद’ में
स्थानीय लोगों ने जब पुलिस को फोन किया, तो उन्हें उम्मीद थी कि जल्द ही कोई कार्रवाई होगी। लेकिन आधे घंटे तक पुलिस का कोई अता-पता नहीं था। जब डायल 100 पहुंची, तब तक माहौल गर्म हो चुका था और दोनों पक्ष आमने-सामने थे। मौके पर खड़ी पुलिस की भूमिका सिर्फ दर्शक की रही।
अमृता सिंह ने लगाए गंभीर आरोप
घटना की शिकायत करने वाली अमृता सिंह का कहना है कि वह पहले उस मकान में किराए से रहती थीं और बाद में उन्होंने मकान खरीदने के लिए एडवांस रकम दी थी। उन्होंने घर की मरम्मत पर लाखों खर्च किए, लेकिन बाद में सौदा पलट दिया गया। अमृता का कहना है कि जब वह घर पर नहीं थीं, तभी दबंगों ने आकर ताला तोड़ा, अंदर घुसे और सारा सामान बाहर फेंक दिया।
अमृता के साथी आकाश सिंह राजपूत ने बताया कि घर में रखे करीब 15 लाख रुपये के सोने-चांदी के जेवरात चोरी हो गए हैं। यह सिर्फ कब्जा नहीं, खुली लूट थी।
मकान मालकिन का दावा—”मेरा मकान है, मेरा हक”
वहीं दूसरी ओर, मकान की मालकिन नीलम तोमर ने साफ कहा कि मकान उनका है और जब किरायेदार ने कई बार कहने के बावजूद मकान खाली नहीं किया, तो उन्होंने सामान बाहर निकलवा दिया। उनका दावा है कि उन्हें किसी तरह की रकम नहीं मिली है और कब्जा अवैध था।
कानून के रास्ते की अनदेखी, पुलिस की लाचारी
इस पूरे प्रकरण में सबसे शर्मनाक पहलू यह रहा कि सामान बाहर निकालने से पहले थाने में कोई सूचना नहीं दी गई। यानी पूरी प्रक्रिया बिना किसी वैधानिक अनुमति के की गई। थानेदार आशीष मिश्रा ने खुद माना कि पुलिस को सिर्फ फोन पर सूचना मिली थी, कोई पूर्व जानकारी नहीं दी गई थी।
विडियोग्राफी गायब, पुलिस की कार्यशैली पर सवाल
घटना के समय कोई वीडियोग्राफी नहीं कराई गई। इससे यह सवाल उठता है कि जब मामला पहले से विवादित था, तो पुलिस ने वीडियोग्राफी क्यों नहीं कराई? क्यों नहीं समय रहते मौके पर पहुंचकर हालात को संभाला गया?
कानून ताक पर, दबंगई हावी
रीवा की इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आम आदमी की सुरक्षा और संपत्ति पर अब केवल कानूनी कागजों से भरोसा नहीं किया जा सकता। जब ताला तोड़ने वाले खुलेआम घूम रहे हों, और पुलिस आधे घंटे बाद पहुंचे, तो सवाल ये उठता है—क्या रीवा में अब सिर्फ ताकतवर का ही हक बचेगा?
चोरहटा पुलिस ने दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर लिए हैं, लेकिन असल सवाल ये है कि क्या इस मामले में आरोपियों पर सख्त कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?
आम जनता देख रही है… इंतज़ार कर रही है… न्याय का, और उस कानून का जो अब सिर्फ किताबों में रह गया है।













