
मऊगंज, एक तरफ मऊगंज को जिला घोषित कर विकास की उम्मीदें जगाई गई थीं, तो दूसरी तरफ अब यही जिला आम नागरिकों के लिए खौफ का केंद्र बनता जा रहा है। दिनदहाड़े हो रही चोरियों, और पुलिस की ढुलमुल कार्रवाई से पूरे जिले में दहशत का माहौल है। जनता अब यह सवाल कर रही है कि क्या मऊगंज में पुलिस और चोरों की मिलीभगत से अपराध फल-फूल रहे हैं?सबसे ताजा मामला सामने आया है जनपद पंचायत मऊगंज के सचिव संघ अध्यक्ष उमेश शुक्ला का। वे अपनी पत्नी को इलाज के लिए इलाहाबाद ले जा रहे थे। रास्ते में मऊगंज के आशीर्वाद हॉस्पिटल के सामने अपनी गाड़ी खड़ी की। चंद मिनटों के लिए वे हॉस्पिटल गए और जब लौटे तो उनकी गाड़ी की डिग्गी से एक लाख रुपये से अधिक की नकदी गायब थी। उमेश शुक्ला के अनुसार, गाड़ी कुछ ही मिनटों के लिए छोड़ी गई थी। “मैं बाथरूम गया, फिर पत्नी की तबीयत बिगड़ी, हॉस्पिटल से दवा लेने अंदर गया और लौटते ही देखा कि गाड़ी की डिग्गी खुली है और नकदी गायब,” उन्होंने बताया। हैरानी की बात यह है कि ये पूरी वारदात हॉस्पिटल के सामने लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हुई, बावजूद इसके पुलिस अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सकी है। 2 दिन से अधिक बीत चुके हैं, लेकिन मऊगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। पीड़ित का आरोप है कि पुलिस न तो फोन उठा रही है, न ही अपराधियों की तलाश में गंभीरता दिखा रही है। जब इस पूरे प्रकरण पर पत्रकार दीपक गुप्ता ने मऊगंज एसपी श्री दिलीप सोनी से बात की, तो उन्होंने कहा, “मामला मेरे संज्ञान में नहीं था। अब जब जानकारी मिली है, तो निश्चित रूप से जल्द से जल्द कार्रवाई की जाएगी।” पर सवाल ये उठता है कि क्या एसपी को मऊगंज में हो रही चोरियों की खबरें नहीं मिल रही थीं? क्या इतने बड़े पैमाने पर हो रही वारदातों की भनक पुलिस मुख्यालय तक नहीं पहुंच रही? या फिर जानबूझकर इन घटनाओं को अनदेखा किया जा रहा है? मऊगंज जिले में बीते कुछ महीनों से लगातार चोरियों की घटनाएं बढ़ रही हैं — और पुलिस का रवैया हर बार एक जैसा रहता है: “जांच जारी है।” जनता अब इस रटा-रटाया जवाब नहीं चाहती, वो सुरक्षा चाहती है, जवाबदेही चाहती है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब मऊगंज तहसील हुआ करता था, तब हालात बेहतर थे। लेकिन जिला बनते ही अपराधियों को जैसे खुली छूट मिल गई हो। चोरी की घटनाएं, लूट, और पुलिस की निष्क्रियता ने मऊगंज को ‘तमाशा’ बनाकर रख दिया है।
क्या अब मऊगंज में अपराधियों का राज चलेगा?
क्या प्रशासन सिर्फ तब जागेगा जब किसी बड़े अफसर या नेता के साथ घटना होगी?
जब सीसीटीवी फुटेज तक मौजूद है, तब भी कार्रवाई नहीं होती, तो आम नागरिकों को किस भरोसे पर जीना होगा?सरकार और पुलिस प्रशासन को चाहिए कि अब इस जिले को ‘चोरों का अड्डा’ बनने से रोके और सख्त से सख्त कदम उठाए। वरना वह दिन दूर नहीं जब जनता अपना भरोसा पूरी तरह खो देगी — न सिर्फ पुलिस से, बल्कि पूरे शासन-प्रशासन से।













