
मध्य प्रदेश का सीधी जिला इन दिनों रेत माफियाओं के कब्जे में है। प्रशासन ने जिले की सभी रेत खदानों को बंद करने का आदेश दे रखा है, फिर भी ज़मीन के नीचे सोने से कीमती इस ‘रेत’ की लूट खुल्लमखुल्ला जारी है। इस बार रेत चोरी की पटकथा लिखी गई है सीधी जिले के बहरी थाना क्षेत्र की डोल रेत खदान में, जहां सिंगरौली जिले की रेत ठेका कंपनी ‘सहकार ग्लोबल’ ने खुलेआम प्रशासन को चुनौती दे दी। सरकार के नियमों को ताक पर रखते हुए इस कंपनी ने वहां बड़ी-बड़ी मशीनें लगाकर अवैध उत्खनन शुरू कर दिया। जब तक पुलिस पहुंची, तब तक अच्छी-खासी रेत निकाली जा चुकी थी, लेकिन कार्रवाई करते हुए मौके से मशीन और वाहन जब्त कर लिए गए हैं। सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि जब जिले में खदानें बंद हैं, तो फिर ये बड़ी-बड़ी मशीनें, डंपर, ट्रैक्टर-ट्रॉली वहां कैसे पहुंच रही हैं? क्या प्रशासन को खबर नहीं थी? या फिर मिलीभगत इतनी गहरी है कि सूचना आने तक माफिया रेत निकालकर चलते बनते हैं? सहकार ग्लोबल’ का दुस्साहस यहीं नहीं थमता। दो दिन पहले ही कुसमी थाना क्षेत्र के गोतरा गांव में इसी कंपनी के वाहन और मशीनें अवैध रेत खनन करते पकड़ी गईं थीं। वहां कार्रवाई भी हुई, मशीनें जब्त हुईं, 22 प्रकरण दर्ज हुए। लेकिन कंपनी पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। दो दिन के भीतर फिर से वही हरकत, सिर्फ थाना बदल गया — इस बार बहरी थाना क्षेत्र में। कहने को तो ये “नियम कानून का राज्य” है, लेकिन व्यवहार में हालात ये हैं कि एक प्राइवेट कंपनी सीधी जिले में घुसकर मनमाने तरीके से रेत निकाल रही है और जिला प्रशासन मूकदर्शक बना बैठा है। क्या जिला प्रशासन की चुप्पी मिलीभगत की पुष्टि करती है? या फिर रेत माफियाओं के आगे पूरा सिस्टम लाचार हो चुका है? अब सबसे बड़ा खतरा ये है कि आगामी 15 जून से वर्षा काल की वजह से खदानें औपचारिक रूप से बंद हो जाएंगी, और इसी को लेकर माफियाओं ने खनन की रफ्तार तेज कर दी है। उन्हें पता है कि आने वाले कुछ महीने कमाई ठप हो जाएगी, इसलिए अब दिन-रात खनन किया जा रहा है — वो भी बिना किसी वैध अनुमति के। प्रश्न यह है कि प्रशासन कब जागेगा? क्या हर बार सिर्फ वाहन जब्त कर देने से रेत माफिया रुक जाएंगे? जब तक बड़े स्तर पर लाइसेंस रद्द, कंपनियों पर भारी जुर्माना और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होगी — सीधी की रेत खुलेआम यूं ही लुटती रहेगी और माफिया कानून को ठेंगा दिखाते रहेंगे।













