
मऊगंज, मध्यप्रदेश। जनपद पंचायत मऊगंज में 43 लाख रुपये के फर्जी भुगतान का मामला अब तूल पकड़ चुका है। इस गोरखधंधे ने न सिर्फ स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि जनप्रतिनिधियों को भी सड़क पर उतरने को मजबूर कर दिया है। मामले की शिकायत जनपद अध्यक्ष व उपाध्यक्ष समेत कई सदस्यों ने खुद कलेक्टर संजय कुमार जैन से की है। सदस्यों ने एकजुट होकर ज्ञापन सौंपा और इस आर्थिक घोटाले की निष्पक्ष जांच के साथ-साथ दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। शिकायत में जिन अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगे हैं, उनमें जनपद के पीसीओ प्रभारी, बीपीओ प्रभारी, प्रशासनिक सीईओ राम कुशल मिश्रा और प्रभारी सीईओ ए.बी. खरे शामिल हैं। आरोपों के मुताबिक, इनकी मिलीभगत से करोड़ों की सरकारी योजनाओं में गड़बड़ी की गई और लगभग ₹43 लाख की राशि फर्जी तरीके से जारी कर दी गई। सबसे बड़ा खुलासा मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में लंच पैकेट वितरण से जुड़ा है। जिस एजेंसी को भुगतान होना था, उसकी जगह एमकेएस नामक संस्था के खाते में ₹20,21,915 की राशि ट्रांसफर कर दी गई। यह भुगतान भी सीधे सीईओ राम कुशल मिश्रा के निर्देश पर किया गया। इसके अलावा, प्रदीप इंटरप्राइजेज को ₹9,43,580 का पेमेंट हुआ, जबकि जनप्रतिनिधियों का दावा है कि यह एजेंसी कार्य स्थल पर नजर तक नहीं आई थी। अन्य एजेंसियों को भी ऐसे ही फर्जीवाड़े के जरिए लाभ पहुंचाया गया, जिसका सीधा मतलब है – जनधन की खुली लूट। जनपद सदस्यों ने सात सूत्रीय मांग पत्र में स्पष्ट किया कि यह सिर्फ एक मामला नहीं है, बल्कि लंबे समय से चल रहे भ्रष्टाचार की एक बानगी है। उन्होंने दोषियों के निलंबन, रिकवरी और भविष्य में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी ऑडिट सहित कठोर कदमों की मांग की है। कलेक्टर संजय कुमार जैन ने मामले को गंभीर मानते हुए तत्काल जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने रीवा जिला पंचायत के सीईओ को इसकी जिम्मेदारी सौंपी है और भरोसा दिलाया कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
अब जनता का सवाल है – क्या वाकई कार्रवाई होगी या यह मामला भी सरकारी फाइलों में धूल खा जाएगा?
स्थानीय लोग इस मुद्दे को लेकर आक्रोशित हैं और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। अगर इस मामले पर ईमानदारी से कार्रवाई नहीं हुई, तो मऊगंज का यह घोटाला आने वाले समय में एक बड़ा जन आंदोलन भी बन सकता है।













