
मऊगंज – जहाँ एक ओर शासन प्रशासन नशा मुक्त भारत का नारा बुलंद करता है, वहीं मऊगंज जिले का आबकारी विभाग खुद अपने मकसद से भटकता नजर आ रहा है। ताज्जुब की बात ये है कि विभाग की कार्रवाई से ज़्यादा उसके भीतर की लेनदेन वाली ‘काली सच्चाई’ चर्चा का विषय बन चुकी है। कुछ ही दिन पहले की बात है। सीतापुर क्षेत्र में कोरेक्स की एक पूरी पेटी पकड़ी गई थी। इस मामले को लेकर जनता को ये भ्रम दे दिया गया कि कार्रवाई हो चुकी है, अपराधियों पर शिकंजा कस दिया गया है। लेकिन जो असली सच्चाई है, वो आपको शायद ही पता हो। हमारे सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस मामले में कोरेक्स की पेटी को जब्त करने के बजाय मऊगंज के आबकारी विभाग ने सीधे तौर पर ₹50,000 की “डील” कर डाली। न कोरेक्स की ज़ब्ती, न NDPS एक्ट की कोई धाराएँ, बस मामला वहीं खत्म! बताया जा रहा है कि ये विभाग पहले ऐसे नशीले माल की जानकारी जुटाता है, फिर पकड़ने का नाटक करता है, और उसके बाद शुरू होता है ‘लेनदेन का खेल’। अगर सौदा पक्का हो जाए, तो न मामला बनता है, न गिरफ्तारी होती है। और अगर सामने वाला ‘डील’ करने को राजी नहीं हो, तभी ये दिखावे की कार्रवाई करते हैं ताकि खुद को सुर्खियों में रखा जा सके। एक नहीं, कई बार ऐसा हुआ है जहाँ पकड़े गए मामलों को विभाग ने “दफा-रफा” कर दिया। आरोपियों से मोटी रकम लेकर उन्हें छोड़ दिया गया। कार्रवाई केवल वहीं होती है जहाँ पैसे नहीं मिलते या फिर मीडिया का दबाव बनता है। छोटे-मोटे मामलों में भी छापेमारी कर फोटो खिंचवाकर अखबारों की शोभा बढ़ाने वाले अधिकारी असल में नशे के कारोबार को बढ़ावा देने का अप्रत्यक्ष माध्यम बन चुके हैं।













