विंध्य की युवा कवयित्री स्नेहा त्रिपाठी सड़क हादसे में गंभीर, आईसीयू में जिंदगी की जंग

रीवा। विंध्य की जानी-मानी युवा कवयित्री स्नेहा त्रिपाठी इन दिनों सड़क हादसे के बाद जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही हैं। 20 वर्षीय स्नेहा 10 सितंबर को एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गईं, जिसके बाद से वह रीवा के एक निजी अस्पताल के आईसीयू वार्ड में वेंटिलेटर पर भर्ती हैं। गंभीर चोट लगने के कारण उन्हें अब तक होश नहीं आया है।

स्नेहा त्रिपाठी को 14 सितंबर को भोपाल में आयोजित कवि कुम्भ सम्मेलन में मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा सम्मानित किया जाना था, लेकिन उससे पहले ही वह हादसे की शिकार हो गईं। रायपुर कर्चुलियान थाना क्षेत्र के ग्राम खैरा पोस्ट गुरगांव की रहने वाली स्नेहा बेहद सामान्य परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता सुखेंद्र कुमार त्रिपाठी शिक्षक हैं और मां गृहिणी हैं। परिवार में एक छोटा भाई भी है।

पिता ने बताया कि स्नेहा मऊगंज जिले के सूजी उमरी गांव स्थित डाकघर में ब्रांच पोस्ट मास्टर के पद पर कार्यरत हैं। हादसा तब हुआ जब वह एक साथी कर्मचारी के साथ बाइक से घर लौट रही थीं। मऊगंज के रामपुरवा हटवा गांव के पास अचानक सामने आए बैल से टकराने के कारण बाइक अनियंत्रित होकर गिर गई। हादसे में स्नेहा के सिर पर गंभीर चोट आई, जबकि बाइक चला रहे उनके साथी कर्मचारी का हाथ फ्रैक्चर हो गया।

डॉक्टरों के मुताबिक, स्नेहा के स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है, लेकिन उन्हें होश आने में अभी कई दिन लग सकते हैं। परिवार का कहना है कि इलाज का खर्च लाखों रुपए तक पहुंच चुका है और उनकी आर्थिक स्थिति इस बोझ को उठाने की नहीं है। ऐसे में उन्होंने शासन-प्रशासन और आम जनता से मदद की अपील की है।

स्नेहा ने कम उम्र में ही साहित्य जगत में अपनी विशेष पहचान बनाई है। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर के कई कवि सम्मेलनों में अपनी कविताओं से श्रोताओं को प्रभावित किया है। दूरदर्शन, आकाशवाणी और कई साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में उनकी रचनाएं प्रकाशित हो चुकी हैं। विशेष रूप से शृंगार रस की कविताओं ने उन्हें विंध्य की प्रतिनिधि कवयित्री बना दिया है।

साहित्यकार आशीष तिवारी निर्मल बताते हैं कि स्नेहा बचपन से ही कविताओं की ओर आकर्षित थीं। विद्यालयीन मंचों से शुरुआत करने वाली स्नेहा ने अब राष्ट्रीय स्तर तक ख्याति अर्जित कर ली है। भोपाल स्थित रविन्द्र भवन में 14-15 सितंबर को आयोजित मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी सम्मेलन में उनकी उपस्थिति तय थी, लेकिन हादसे के कारण वह शामिल नहीं हो सकीं।

पूरे विंध्य और साहित्य जगत में स्नेहा त्रिपाठी के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थनाएं की जा रही हैं। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि वह जल्द ठीक होकर एक बार फिर अपने काव्य से प्रदेश और देश का मान बढ़ाएंगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

यह भी पढ़ें