
थाईलैंड की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। प्रधानमंत्री पैतोंगटार्न शिनावात्रा को संवैधानिक अदालत ने पद से हटा दिया है। अदालत ने उनकी पूरी कैबिनेट को भी भंग कर दिया। अब सत्ता की बागडोर उप-प्रधानमंत्री और गृह मंत्री फुमथाम वेचायाचाई के हाथों में सौंपी गई है, जो कार्यवाहक प्रधानमंत्री के तौर पर तब तक पद संभालेंगे जब तक संसद नया प्रधानमंत्री नहीं चुन लेती।
पैतोंगटार्न शिनावात्रा साल 2008 के बाद पद से हटाई जाने वाली पांचवीं प्रधानमंत्री बनी हैं। उनकी बर्खास्तगी का कारण बना थाईलैंड और कंबोडिया के बीच का पुराना सीमा विवाद। दरअसल, दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव बढ़ने के बाद शिनावात्रा ने कंबोडिया के पूर्व प्रधानमंत्री हुन सेन को फोन किया था। इसी कॉल ने उनके राजनीतिक करियर की गाड़ी पटरी से उतार दी।
फोन कॉल में उन्होंने हुन सेन को “अंकल” कहकर संबोधित किया और काफी झुककर बातचीत की। इतना ही नहीं, शांति बहाल करने के लिए उनकी मांग पूरी करने का भी आश्वासन दिया। जब हुन सेन ने यह कॉल सार्वजनिक कर दी तो थाईलैंड में हड़कंप मच गया। विपक्ष ने इसे राष्ट्रीय हितों के खिलाफ करार दिया और सीनेटरों ने अदालत में याचिका दाखिल कर दी। अदालत ने इसे गंभीर नैतिक उल्लंघन मानते हुए उन्हें जुलाई में प्रधानमंत्री पद से बर्खास्त कर दिया।
थाईलैंड और कंबोडिया के बीच दशकों से सीमा विवाद चला आ रहा है। हाल ही में दोनों देशों के बीच झड़प में सैनिकों की मौत के बाद हालात और बिगड़ गए थे। करीब एक लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया। ऐसे माहौल में शिनावात्रा का कंबोडियाई नेता से इतनी नरमी से बात करना जनता और विपक्ष को नागवार गुज़रा।
शिनावात्रा ने सफाई दी कि उनकी बातचीत सिर्फ तनाव कम करने और शांति कायम करने के उद्देश्य से थी। लेकिन जनता और विरोधियों को उनकी दलीलें रास नहीं आईं।
अब सवाल यह है कि थाईलैंड की सत्ता किसके हाथ में जाएगी। राजनीतिक गलियारों में कई बड़े नाम चर्चा में हैं। पूर्व न्याय मंत्री और अटॉर्नी जनरल 77 वर्षीय चाइकासेम नीतिसिरी, पूर्व गृह मंत्री और उप-प्रधानमंत्री अनुतिन चार्नविराकुल, मौजूदा ऊर्जा मंत्री पिरापन सलीरथविभागा, पूर्व उप-प्रधानमंत्री जुरिन लक्सनाविसित और पूर्व प्रधानमंत्री प्रयुथ चान-ओचा जैसे नेताओं को संभावित दावेदार माना जा रहा है।
शिनावात्रा की बर्खास्तगी ने थाईलैंड को न केवल राजनीतिक अस्थिरता में धकेल दिया है बल्कि आर्थिक संकट की आशंका भी बढ़ा दी है। अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि थाईलैंड का अगला प्रधानमंत्री कौन होगा और वह पड़ोसी कंबोडिया के साथ बिगड़े रिश्तों को कैसे संभालेगा।













