बैंक राष्ट्रीयकरण वर्षगांठ पर AIBOC का वृक्षारोपण अभियान – भोपाल में हरियाली और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश

भोपाल बैंक राष्ट्रीयकरण की 56वीं वर्षगांठ के अवसर पर ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन (AIBOC) मध्यप्रदेश द्वारा राजधानी भोपाल में Bank Officers’ Public School में एक प्रेरणादायक वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम न सिर्फ पर्यावरण सरंक्षण की दिशा में एक सराहनीय पहल रहा, बल्कि यह बैंकिंग जगत की सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों का भी प्रतीक बन गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता AIBOC मध्यप्रदेश के अध्यक्ष श्री सुबीन सिन्हा ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा –

“बैंकों का राष्ट्रीयकरण महज़ आर्थिक विस्तार नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समावेशिता का ऐतिहासिक कदम था। आज वृक्षारोपण उसी विचारधारा की आधुनिक अभिव्यक्ति है।”

AIBOC मध्यप्रदेश के सचिव श्री दिनेश झा ने बताया कि बैंक अधिकारी अब केवल खातों और ऋणों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सामाजिक चेतना के वाहक बनकर उभर रहे हैं।

“यह आयोजन बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित करेगा।”

कार्यक्रम में विभिन्न बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधि शामिल हुए, जिनमें शामिल रहे:

🔸 यूको बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय महासचिव श्री संदीप चौबे –

“बैंक और वृक्ष – दोनों समाज को स्थायित्व और संरक्षण प्रदान करते हैं। यह पहल बैंकिंग और जन-कल्याण के बीच की दूरी को कम करती है।”

🔸 SBIOA भोपाल सर्कल के वरिष्ठ अधिकारी श्री रजनीश पौराणिक ने कहा –

“बैंकिंग अब केवल आर्थिक नहीं, सामाजिक बदलाव की भी धुरी बन गई है।”

उपस्थित गणमान्य प्रतिनिधि:

  • SBIOA भोपाल सर्कल: क्षितिज तिवारी, अरविंद पंडियार, राहुल सोमकुंवर, रोहित सिंह, प्रहलाद सिंह रायकवार

  • यूनियन बैंक ऑफ इंडिया: दीपक नायर

  • सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया: अम्बरीश नंदा

  • बैंक ऑफ इंडिया: कुलदीप स्वर्णकार, विजय राघवन

  • इंडियन बैंक: प्रशांत रघुवंशी, जयंत सेन, किशन बचले

  • केनरा बैंक: मनीष चतुर्वेदी, टी एन वेंडिया

  • इंडियन ओवरसीज बैंक: दीपक शुक्ला, आशुतोष तिवारी

  • पंजाब नेशनल बैंक: निर्भय सिंह ठाकुर

  • यूको बैंक: सुमित मिश्रा, अंशुल मिश्रा

कार्यक्रम स्थल पर लगाए गए पेड़ केवल पर्यावरण की रक्षा के साधन नहीं थे, बल्कि विद्यार्थियों के लिए जीवंत पाठशाला बन गए – हरियाली, जिम्मेदारी और समाज सेवा का पाठ पढ़ाते हुए।

यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि AIBOC और उससे जुड़ी बैंकिंग संस्थाएं देश के हरित भविष्य, सामाजिक बदलाव और जन-जागरूकता की दिशा में न केवल संकल्पबद्ध हैं, बल्कि सक्रिय भागीदार भी हैं।

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