
बिलासपुर। न्याय के मंदिर में ही अन्याय की पटकथा लिखी गई। फैमिली कोर्ट परिसर में उस वक्त हंगामा मच गया जब एक महिला वकील ने अपने ही क्लाइंट और उसके परिजनों पर हाथ उठा दिया। पूरा मामला सिविल लाइन थाना क्षेत्र का है और हैरान करने वाली बात यह रही कि इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें वकील खुद कहती नजर आ रही है — “मुझे किसी का डर नहीं है। घटना 10 जुलाई की है। सुमन ठाकुर नाम की महिला अपने पारिवारिक विवाद को लेकर अपनी मां सावित्री देवी (जो हार्ट पेशेंट हैं) और भाई मुकुंद ठाकुर के साथ फैमिली कोर्ट पहुंची थी। लेकिन यहां उन्हें कानून की मदद नहीं, बल्कि अपमान और हिंसा मिली। पीड़िता का आरोप है कि उनकी वकील लीना अग्रहरी ने पहले फीस ली, फिर केस से पल्ला झाड़ लिया। जब सुमन ने इसका विरोध किया, तो लीना भड़क गईं और खुलेआम गाली-गलौज करते हुए सुमन के बाल पकड़कर खींचने लगीं। इतना ही नहीं, हार्ट पेशेंट मां को धक्का देकर जमीन पर गिरा दिया गया और भाई मुकुंद ठाकुर का कॉलर पकड़कर उन्हें धमकाया गया। वीडियो में महिला वकील की दबंगई साफ दिख रही है, जबकि पुलिसकर्मी मौके पर मौजूद थे, लेकिन पूरी तरह नाकाम साबित हुए। पुलिस ने मामले की लीपापोती करते हुए बस यही कहा कि दोनों पक्षों में झूमाझटकी हुई और बाद में “समझौता” हो गया। लेकिन बड़ा सवाल यह है — किस कानून में वकील को हाथ उठाने का हक मिलता है? क्या एक हार्ट पेशेंट महिला और उसकी बेटी को इस तरह कोर्ट में पीटना, किसी समझौते से खत्म किया जा सकता है? इस घटना ने कानून के रक्षकों पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। एक ओर जहां वकील पर भरोसा करके लोग अदालत पहुंचते हैं, वहीं जब वही वकील हाथ चला दे तो इंसाफ की उम्मीद कहां बचेगी?













