रीवा में 15 अफसरों पर गिरी कलेक्टर की गाज, तीन दिन में मांगा जवाब!

रीवा जिले में अफसरशाही की लापरवाही अब महंगी पड़ने जा रही है। कलेक्टर प्रतिभा पाल ने सीएम हेल्पलाइन में घटिया प्रदर्शन और विभागीय रैंकिंग सुधार में लापरवाही बरतने वाले 15 अफसरों को कारण बताओ नोटिस थमा दिया है। ये कोई साधारण चेतावनी नहीं, बल्कि साफ शब्दों में कहा गया है कि अगर तीन दिन में संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो एक वार्षिक वेतनवृद्धि रोकी जाएगी और एकपक्षीय अनुशासनात्मक कार्रवाई भी तय मानी जाए।

कौन-कौन अफसर चढ़े कलेक्टर की निगाह में?

कलेक्टर ने जिन अफसरों को लापरवाही का जिम्मेदार ठहराया है, उनमें शामिल हैं:

  • एमपीईबी रायपुर कर्चुलियान के कार्यपालन यंत्री सुशील पाण्डेय

  • मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजीव शुक्ला

  • लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी सिरमौर के सहायक यंत्री सुधांशु शर्मा

  • एलडीएम (लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर) जगमोहन

इसके अलावा कार्रवाई की जद में आए अन्य अफसर हैं:

  • एमपीईबी रीवा के कार्यपालन यंत्री भूपेश विक्रम सिंह

  • जिला आपूर्ति नियंत्रक कमलेश ताण्डेकर

  • महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी नयन सिंह

  • एमपीईबी त्योंथर के कार्यपालन यंत्री ज्ञानेन्द्र सिंह

  • अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के जिला संयोजक कमलेश्वर सिंह

  • लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन यंत्री नितिन पटेल

  • लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी हुजूर के सहायक यंत्री मनीष मिश्रा

  • लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी रायपुर कर्चुलियान के सहायक यंत्री अतुल तिवारी

  • पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सहायक संचालक योगेन्द्र राज

  • वन विभाग के अनुविभागीय अधिकारी हृदयलाल सिंह

  • एमपीईबी सिटी डीई नरेन्द्र मिश्रा

कलेक्टर का सख्त संदेश – “काम नहीं, तो कुर्सी नहीं!”

श्रीमती प्रतिभा पाल ने अपने प्रशासनिक तेवरों से साफ कर दिया है कि अब जिले में कामचोरी या ढिलाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। रीवा जैसे संभागीय मुख्यालय में यदि अफसर ही जवाबदेह नहीं होंगे तो जनता को जवाब कौन देगा?

अब देखना यह होगा कि ये अफसर जवाब देंगे या जवाबदेही से भागेंगे। लेकिन एक बात तय है — रीवा में अब सिस्टम हिलाने की तैयारी हो चुकी है।

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