
रीवा (मऊगंज)। विंध्य क्षेत्र के प्रसिद्ध देवतालाब शिव मंदिर में 11 जुलाई से सावन मेला शुरू हो रहा है। सालों से लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना यह स्थल एक बार फिर शिवभक्तों से गुलजार होगा। लेकिन सवाल ये है कि क्या व्यवस्थाएं इस बार आस्था के मानक पर खरी उतरेंगी या फिर सुरक्षा और सुविधा के नाम पर सबकुछ कागजों में ही सिमट जाएगा?
सुरक्षा के दावे, लेकिन क्या हकीकत में दम है?
प्रशासन ने दावा किया है कि मेले में सुरक्षा के लिए 150 पुलिसकर्मी दो शिफ्ट में तैनात रहेंगे। इनमें 40 महिला पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। एएसपी विक्रम सिंह के अनुसार, सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और एक कंट्रोल रूम भी बना है। लेकिन पिछले वर्षों की घटनाएं बताती हैं कि कंट्रोल रूम सिर्फ एक ‘फोटो ऑप’ बनकर रह जाता है – नज़दीकी ग्रामीण अक्सर कहते हैं कि “कैमरे होते हैं, पर चालू नहीं।”
सादगी नहीं, अब स्मार्ट व्यवस्थाएं चाहिए!
तीन जगहों पर पार्किंग की बात है – गनिगवा पेट्रोल पंप, खटखरिहा तालाब और स्थानीय स्टेडियम। लेकिन हर बार की तरह सवाल उठता है कि क्या इन स्थानों तक पहुंचने वाले रास्तों की स्थिति सुधारी गई है? क्या इन पार्किंग स्थलों पर कोई गाइडिंग बोर्ड या स्वयंसेवक मौजूद होंगे? भीड़ में फंसकर घंटों तक भटकना फिर से श्रद्धालुओं की नियति बन जाएगा?
शिवभक्तों के लिए भक्ति या भीड़भाड़ की त्रासदी?
हर सावन में भीड़ की लहर प्रशासन के दावों की पोल खोल देती है। न तो जलाभिषेक की लंबी कतारों में कोई ठोस इंतजाम नजर आता है, न ही पेयजल या प्राथमिक उपचार की सुविधा।
इस बार प्रशासन ने जोर-शोर से दावा किया है, लेकिन अब ज़रूरत है ज़मीनी सच्चाई दिखाने की। सिर्फ प्रेस नोट या मीडिया ब्रीफिंग से भक्तों की परेशानी कम नहीं होगी – असली शिव सेवा तो तभी मानी जाएगी जब आस्था में आने वाली हर रुकावट को हटाया जाए।













