
भोपाल, मध्यप्रदेश। राज्य सरकार ने अब जनता को सिर्फ पेट भरने वाला राशन नहीं, बल्कि शरीर को संपूर्ण पोषण देने का बीड़ा उठाया है – और वो भी उन्हीं सरकारी राशन की दुकानों से! इसे कहते हैं सरकारी सिस्टम में ज़रा सी इंसानियत घोलना। मध्यप्रदेश में अब सरकारी उचित मूल्य की दुकानों को ‘जन पोषण केन्द्र’ में बदला जा रहा है – ताकि एक छत के नीचे मिले राशन भी, पोषण भी। इस योजना की पहली सांस इंदौर में ली गई, जहाँ 30 उचित मूल्य दुकानों को पायलट प्रोजेक्ट के तहत जन पोषण केन्द्र में बदला गया। अब इस नवाचार को उज्जैन और सागर जिले तक भी फैला दिया गया है – जहाँ 15-15 दुकानों को चिन्हित कर, वहीं से जनता को पौष्टिक आहार की सामग्री भी मुहैया कराई जाएगी।
लेकिन असली सवाल यह है – क्या यह बदलाव सिर्फ कागज़ों में ही रहेगा, या ज़मीन पर भी उतरेगा?
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत का कहना है कि यह एक “अभिनव पहल है जिससे उपभोक्ताओं को एक ही जगह पर गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री और पोषण उत्पाद मिल सकेंगे।” इस योजना का मकसद सिर्फ डीलरों की जेब भरना नहीं, बल्कि जनता को सस्ता, टिकाऊ और सेहतमंद सामान देना है।
उपभोक्ताओं की राय क्या कहती है?
स्थानीय लोगों ने इस प्रयास की सराहना की है। उनका कहना है कि अब उन्हें बाज़ार के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। जब राशन के साथ ही बाजरा, दाल, सोयाबीन, डेयरी उत्पाद और खाद्य तेल भी वहीं मिल जाएगा, तो वो क्यों भटकें? जन पोषण केन्द्रों में डिजिटल टूल्स, आसान लोन सुविधा, कॉमन सर्विस सेंटर और बैंकिंग सुविधाएं भी शामिल की जा रही हैं। राशन डीलरों को राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान द्वारा ट्रेंड किया गया है ताकि वो सिर्फ राशन नहीं, बल्कि सेवा और सेहत दोनों बांट सकें। इस पूरी योजना पर राज्य स्तरीय प्रबंधन समिति निगरानी रख रही है, ताकि यह जनहित योजना सिर्फ पोस्टर-बैनर तक सीमित न रहे।
अब देखना यह होगा कि ये पोषण केंद्र, सरकारी योजनाओं की लंबी कतार में भीड़ बनकर रह जाएंगे या वाकई जनता को राहत देंगे।













