
मऊगंज। जो समाज की सेवा करे, वो ही निशाने पर? मऊगंज जिले के नईगढ़ी में कुछ ऐसा ही होता दिख रहा है। जनपद अध्यक्ष ममता तिवारी और उनके समाजसेवी पति कुंज बिहारी तिवारी पर जो आरोप लगे हैं, वे न सिर्फ चौंकाने वाले हैं, बल्कि लोकतंत्र और जनसेवा के मुंह पर करारा तमाचा हैं।
ईमानदारी की कीमत – झूठा मुकदमा!
जनहित के मुद्दों पर लगातार आवाज़ उठाने वाले कुंज बिहारी तिवारी पर ₹50,000 की चोरी का आरोप लगाया गया है। हैरानी की बात ये है कि यह आरोप उन्हीं पर लगाया गया है, जिन्होंने खुद थाना परिसर में टाइल्स लगवाईं, रिकॉर्ड रूम बनवाया और एक एसी तक दान किया। क्या कोई व्यक्ति जो थाने को सुसज्जित करने में अपनी जेब से खर्च करता है, वही चोरी करेगा?
समाजसेवा बना गुनाह?
कोविड काल की वह भयावह घड़ी हर किसी को याद है, लेकिन नईगढ़ी का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शायद कभी नहीं भूलेगा कि कुंज बिहारी तिवारी ने वहां अपने पैसे से कूलर लगवाए, कोविड रूम बनवाया, ताकि जनता को राहत मिल सके। लेकिन आज उसी समाजसेवक को अपराधी की तरह कटघरे में खड़ा कर दिया गया है।
बिना जांच, सीधे FIR – किसके इशारे पर?
सबसे बड़ा सवाल पुलिस की भूमिका पर उठता है। बिना किसी विस्तृत जांच के, बिना साक्ष्य के सीधे मुकदमा दर्ज कर लिया गया। क्या यह न्याय की प्रक्रिया है या किसी की ईमानदारी से चिढ़ रखने वालों का दबाव? क्या मऊगंज की पुलिस अब निष्पक्ष नहीं, निर्देशित होकर काम कर रही है?
कलेक्टर से न्याय की गुहार
गुरुवार को जनपद अध्यक्ष ममता तिवारी ने कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। उनका कहना था – “यह सिर्फ मेरे पति पर नहीं, समाजसेवा की सोच पर हमला है। ऐसे झूठे आरोपों के पीछे जो ताकतें काम कर रही हैं, उन्हें बेनकाब करना ज़रूरी है।”
पुलिस अधीक्षक ने दिया आश्वासन, पर क्या मिलेगा न्याय?
मामले ने तूल पकड़ लिया है। पुलिस अधीक्षक मऊगंज ने निष्पक्ष जांच का भरोसा जरूर दिलाया है, लेकिन जनता का भरोसा तब तक बहाल नहीं होगा, जब तक इस साजिश के पीछे की सच्चाई उजागर नहीं होती।
जनता पूछ रही है – क्या अब ईमानदारी जुर्म बन गई है?
नईगढ़ी और आसपास के क्षेत्र में इस घटनाक्रम को लेकर गहरी नाराज़गी है। लोगों का कहना है कि यह केवल कुंज बिहारी तिवारी की नहीं, हर उस व्यक्ति की लड़ाई है जो बेखौफ होकर व्यवस्था से सवाल करता है।
अब सवाल सिर्फ एक है – क्या सच का साथ देने वाले इस देश में सुरक्षित हैं? या उन्हें साजिशों में उलझाकर चुप कराना ही अब नया सिस्टम बन गया है?













