
मऊगंज, मध्यप्रदेश | मऊगंज के हनुमना थाना क्षेत्र अंतर्गत डीपी होटल के पास स्थित पत्थर खदान एक बार फिर मौत की गवाही दे रही है। इस बार खदान ने छीना है एक 18 साल के युवक का जीवन — सोनू रत्नाकर, जो गहरबरा गांव का रहने वाला था। शनिवार की शाम सोनू घर से निकला तो किसी को क्या पता था कि यह उसकी आखिरी शाम होगी। जब वह देर रात तक वापस नहीं लौटा तो परिजनों की चिंता बढ़ी। गुमशुदगी की रिपोर्ट थाने में दर्ज कराई गई, लेकिन पुलिस का रवैया फिर वही ढीला–ढाला रहा। रात करीब 1:30 बजे परिजन खुद खोजबीन करते हुए डीपी होटल के पास पहुंचे, जहां खदान के किनारे एक जोड़ी जूते, गमछा और आसमानी रंग की टोपी पड़ी मिली। ये वही कपड़े थे, जो सोनू ने पहन रखे थे। परिजनों ने खुद मौके पर सोनू की पहचान सुनिश्चित की और तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने हालांकि मौके पर पहुंचकर औपचारिकता निभाई, लेकिन अगले दिन — यानी सोमवार को — एसडीआरएफ की टीम बुलाई गई। सवाल ये उठता है कि जब रात में ही लापता युवक के सामान मिल गए थे, तो सर्चिंग कार्य अगले दिन तक क्यों टाला गया?

सोमवार को करीब चार घंटे की मशक्कत के बाद शव को खदान के पानी से बाहर निकाला गया। शव की हालत देख परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। सोनू के पिता रमेश रत्नाकर ने बताया कि उन्होंने ही सबसे पहले अपने बेटे के कपड़े पहचाने और लगातार प्रशासन से गुहार लगाई। शाम 5 बजे शव का पोस्टमॉर्टम कर परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू करने की बात कही है, लेकिन यह केवल एक औपचारिक बयान बनकर रह गया है। इलाके में चर्चा है कि यह केवल दुर्घटना नहीं, बल्कि गहराई से छानबीन करने लायक मामला हो सकता है।
अब सवाल ये उठता है कि:
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क्या यह सिर्फ एक हादसा था या किसी साजिश का हिस्सा?
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अगर सोनू खुद खदान में गया था, तो किसके साथ गया और क्यों?
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क्या प्रशासन की लापरवाही ने सोनू की जान जाने दी?
इन तमाम सवालों के जवाब अभी बाकी हैं, लेकिन एक बात साफ है — मऊगंज की खदानें अब सिर्फ पत्थर नहीं उगल रहीं, ये अब लाशें भी उगलने लगी हैं।













