कटनी पुलिस पर तहसीलदार का हमला: “मेरी हत्या की थी साजिश, बेटे के सामने की मारपीट

कटनी महिला थाना बना हाई वोल्टेज ड्रामा का अड्डा, तहसीलदार शैलेंद्र शर्मा ने पुलिस और एसपी पर लगाए सनसनीखेज आरोप

कटनी जिले का महिला थाना शनिवार को अचानक एक हाई वोल्टेज ड्रामे का केंद्र बन गया। मामला सिर्फ इतना था कि सीएसपी ख्याति मिश्रा का ट्रांसफर हो गया था, और उनके पति – दमोह जिले के घटेरा में पदस्थ तहसीलदार शैलेंद्र बिहारी शर्मा – अपने परिजनों और बेटे के साथ उनकी सरकारी निवास से सामान शिफ्ट कराने पहुंचे थे। लेकिन आगे जो हुआ, उसने पूरे शहर को हिला कर रख दिया। तहसीलदार शैलेंद्र शर्मा का आरोप है कि पुलिस ने उनके परिवार को बंगले से उठाकर थाने में बंद कर दिया और उनके साथ जमकर मारपीट की गई – वह भी उनके 10 वर्षीय बेटे के सामने। इतना ही नहीं, उन्होंने कटनी के एसपी अभिजीत रंजन पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “ये सब मेरी हत्या की साजिश का हिस्सा था।”

पुलिस का अचानक सक्रिय होना सवालों के घेरे में

सवाल यह भी उठ रहा है कि एक साधारण पति-पत्नी के बीच की संपत्ति या पारिवारिक खींचतान जैसे मामले में अचानक पूरा पुलिस अमला इतनी तेजी से कैसे सक्रिय हो गया? आम जनता के मामूली झगड़ों पर तो महीनों तक एफआईआर दर्ज नहीं होती, लेकिन इस मामले में पुलिस इतनी ‘तत्पर’ कैसे हो गई? शैलेंद्र शर्मा ने बताया कि जब वे खुद बंगले पर पहुंचे, तब वहां कोई नहीं मिला। बाद में सूचना मिली कि उनके परिवार को महिला थाने ले जाया गया है। जब वे थाने पहुंचे, तो उन्हें गेट पर ही डीएसपी प्रभात शुक्ला ने रोक दिया। इसी दौरान दोनों के बीच जमकर बहस भी हुई। शर्मा का आरोप है कि उन्हें जबरन थाने से भगाया गया।

“मेरे चाचा का एक्सीडेंट करवाया गया, अगला निशाना मैं था”

तहसीलदार का आरोप है कि उनके चाचा जबलपुर से कटनी आ रहे थे, लेकिन रास्ते में तेवरी के पास जानबूझकर उनका एक्सीडेंट करवाया गया। उनका दावा है, “अगर मैं उस वक्त गाड़ी में होता, तो शायद मेरी भी हत्या हो जाती। उन्होंने यह भी कहा कि यह पहली बार नहीं है जब जान से मारने की धमकी मिली है। इससे पहले भी वह केंद्र और राज्य सरकार को इस तरह की धमकियों की शिकायत कर चुके हैं। अब उनका विश्वास है कि आज की घटना ‘सिस्टम’ के भीतर छिपे किसी बड़े खेल का हिस्सा है।

जिला अस्पताल में भी हंगामा, पत्रकारों से भी धक्का-मुक्की

परिजनों को मेडिकल के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां पुलिस और पीड़ित परिवार के बीच फिर से हंगामा हुआ। इसी दौरान कुछ पत्रकार घटनाक्रम की कवरेज के लिए पहुंचे, लेकिन उन्हें महिला थाने में घुसने से रोका गया और धक्का-मुक्की की गई। इससे नाराज पत्रकारों ने प्रदर्शन किया और इस कार्रवाई को प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला करार दिया।

पुलिस की चुप्पी और जांच का वादा

कोतवाली प्रभारी अजय सिंह ने कहा है कि मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचा दिया गया है और जांच के आदेश दिए गए हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या इस मामले में निष्पक्ष जांच हो पाएगी, जब आरोप जिले के सबसे बड़े पुलिस अधिकारी पर हैं?तहसीलदार शैलेंद्र शर्मा के आरोप न सिर्फ गंभीर हैं, बल्कि पुलिस महकमे की कार्यशैली पर भी गहरे सवाल खड़े करते हैं। आम लोगों के मामलों में टालमटोल करने वाली पुलिस, इस ‘पारिवारिक विवाद’ में इतनी तत्पर क्यों हो गई? क्या वाकई यह मामला सिर्फ पति-पत्नी के झगड़े तक सीमित है या फिर परदे के पीछे कुछ और गहरी साजिश चल रही है?

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