भौखरी के 40 परिवारों को कटिया युग से मिलेगी मुक्ति: वर्षों की लड़ाई के बाद बिजली विभाग ने किया स्थल निरीक्षण, अब उम्मीद की लौ जगी

रीवा जिले के त्यौंथर विद्युत संभाग अंतर्गत आने वाले भौखरी ग्राम के नरसिंह मंदिर टोला के लगभग 40 परिवार ऐसे हैं, जिनके लिए आजादी के इतने वर्षों बाद भी ‘बिजली’ एक सपना मात्र थी। कई दशकों से लोग बांस-बल्ली गाड़कर, तारों को जोड़-तोड़कर, जैसे-तैसे बिजली पाने का प्रयास करते रहे। लेकिन अब, लंबे संघर्ष और सामाजिक पहल के बाद पहली बार इन परिवारों को आधिकारिक रूप से बिजली कनेक्शन मिलने की उम्मीद बनी है।

ग्रामीणों की दबी आवाज को शिवानंद द्विवेदी ने बनाया आंदोलन

इस पूरे प्रयास का श्रेय जाता है सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी को, जिन्होंने अप्रैल 2025 के अंतिम सप्ताह में क्षेत्र का दौरा कर समस्या को गंभीरता से लिया। न केवल उन्होंने खुद जाकर प्रभावित परिवारों से बात की, बल्कि रीवा कलेक्टर और संभागायुक्त को लिखित में शिकायत दर्ज कराई।शिवानंद द्विवेदी ने प्रशासन को बताया कि गांव के नरसिंह टोला में लगभग 40 परिवार आज भी बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं। उन्होंने आवेदन में आग्रह किया कि बारिश के पहले इन बस्तियों तक बिजली पहुंचाई जाए ताकि ग्रामीणों को और अधिक परेशानी न उठानी पड़े।

बिजली विभाग हरकत में आया, सर्वे का कार्य शुरू

शिवानंद की शिकायत और प्रयासों पर संज्ञान लेते हुए त्यौंथर विद्युत संभाग के कार्यपालन अभियंता ज्ञानेंद्र ठाकुर और सहायक अभियंता उमाशंकर द्विवेदी ने तुरंत एक्शन लिया। उन्होंने विभागीय टीम को साथ लेकर आरडीएसएस (Revamped Distribution Sector Scheme) योजना के तहत एक स्थल निरीक्षण कराया। इंजीनियर संजय गुप्ता और आरडीएसएस की तकनीकी टीम ने साथ मिलकर पूरे टोले में जाकर घर-घर सर्वे किया और उन सभी परिवारों को सूचीबद्ध किया जिन्हें अब तक बिजली का कनेक्शन नहीं मिल पाया था।

बिजली से वंचित रहे इन परिवारों की अब होगी पहचान

स्थल निरीक्षण के दौरान जिन परिवारों को चिन्हित किया गया, उनमें कई ऐसे हैं जो वर्षों से बिजली कनेक्शन के लिए अधिकारियों के चक्कर काटते रहे। इनमें प्रमुख नाम हैं:

कामता यादव, भैयालाल यादव, रामसजीवन यादव, अमृतलाल प्रजापति, लालमणि यादव, वरम दीन कोल, अभिमान कोल, सौखीलाल कोल, सुग्रीव बसोर, मोतीलाल यादव, सुदामा यादव, बृजेश यादव, सूर्यमणि यादव, रामनिधि यादव, रघुनंदन यादव, शेषमणि यादव, छोटेलाल यादव, रामखेलावन यादव, मंगल यादव, यज्ञनारायण यादव, फूलचंद यादव, सियाशरण यादव, रामनरेश यादव, ठाकुरदीन यादव, गोपी यादव, छोटू कोल, राजू कोल, ऋषि कोल, कमलेश प्रजापति, सातानंद यादव, राजू यादव, मनीष कोल, रजनीश कोल, लक्ष्मण पाल, जगजीवन यादव, देवेंद्र यादव, कल्लू यादव, रामा यादव, रामशिरोमणि यादव, और उमेश यादव।

कटिया, बांस-बल्ली और झूठे वादों की कहानी

स्थानीय निवासी कामता यादव ने बताया कि उन्होंने करीब 7 साल पहले एक सरकारी योजना के तहत मोटर पंप के लिए बिजली कनेक्शन लिया था, लेकिन कनेक्शन सिर्फ कागज़ों पर ही रहा। लोड अधिक होने और वोल्टेज कम रहने के कारण वे आज तक बिजली का समुचित उपयोग नहीं कर सके। फिर भी, हर माह नियमित रूप से बिल भरते रहे। कुछ घरों तक मंदिर तक पहुंची बिजली लाइन से कटिया डालकर ही काम चलाया जा रहा था, लेकिन यह अस्थायी और असुरक्षित उपाय था, जिससे किसी भी समय हादसा हो सकता था।

नेता, विधायक, सांसद—सबको सुनाया, पर किसी ने नहीं सुना

इस समस्या को लेकर ग्रामीणों ने हर मंच पर गुहार लगाई। सरपंच प्रतिनिधि रामसिया यादव के अनुसार, पीड़ित परिवारों ने पूर्व विधायक पंचूलाल प्रजापति, वर्तमान विधायक नरेंद्र प्रजापति, सांसद जनार्दन मिश्रा और कैबिनेट मंत्री राजेन्द्र शुक्ला तक अपनी बात पहुँचाई थी। लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला, समाधान नहीं। आज जब बिजली विभाग ने वास्तव में सर्वे कर लिया है, तो ग्रामीणों को पहली बार भरोसा हो रहा है कि अब शायद उनका अंधकारमय जीवन सचमुच रोशन हो सकता है।

बिजली से मिलेगा सम्मान, विभाग को बढ़ेगा राजस्व

ग्रामीणों ने यह भी कहा कि अगर समय रहते बिजली पहुंचाई जाती है, तो न सिर्फ उनके जीवन में बदलाव आएगा, बल्कि बिजली विभाग का राजस्व भी बढ़ेगा। बिना कनेक्शन के लोग न तो बिल भरते हैं, न ही कानूनी सप्लाई का लाभ उठा सकते हैं। यह न सिर्फ विभाग की विफलता है, बल्कि शासन की प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाता है।

अब अगली चुनौती: कब आएगा ट्रांसफार्मर, कब लगेंगे खंभे?

सर्वे हो चुका है, सूची बन चुकी है। अब सवाल यह है कि क्या बिजली विभाग इस काम को गंभीरता से अंजाम देगा? क्या वास्तव में खंभे गड़ेंगे, तार खिंचेंगे, ट्रांसफार्मर लगेगा और सप्लाई शुरू होगी? या फिर यह पहल भी अन्य योजनाओं की तरह सिर्फ सर्वे और कागज़ी खानापूर्ति बनकर रह जाएगी?]भौखरी के इन 40 परिवारों की कहानी सिर्फ बिजली की नहीं है—यह संघर्ष, उपेक्षा और सिस्टम के खिलाफ खड़े होने की कहानी है। यह उन लोगों की लड़ाई है जिन्हें सालों तक सिस्टम ने अनदेखा किया, पर जिन्होंने हार नहीं मानी।अब जब बिजली विभाग ने पहल की है, उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही रोशनी सिर्फ वादों में नहीं, बल्कि हर घर के भीतर सचमुच दिखाई देगी।

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