बेटियों को बना रहा लोहे जैसा मजबूत ये समर कैंप: श्रुति कीर्ति सोसायटी का सराहनीय प्रयास

रीवा के अनंतपुर स्थित सेल्फ डिफेंस अकादमी में एक माह से चल रहा समर कैंप केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक आंदोलन बन गया है—महिलाओं को आत्मनिर्भर और आत्मरक्षक बनाने का। इस गौरवशाली आयोजन की अगुवाई कर रही है श्रुति कीर्ति सोसायटी समिति, जिसने यह दिखा दिया कि अगर नीयत मजबूत हो और उद्देश्य साफ हो, तो सामाजिक बदलाव का रास्ता मुश्किल नहीं। समापन समारोह में यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय प्रबंधक अजय खरे मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कार्यक्रम की जमकर सराहना की और अपने भाषण में दो टूक कहा—“ऐसे आयोजन न केवल महिलाओं को जागरूक करते हैं, बल्कि उन्हें सामाजिक और मानसिक रूप से इतना मजबूत बना देते हैं कि वे हर मुश्किल को मुस्कराकर झेल सकें। अब समय आ गया है कि हर मां अपने बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पहला कदम उठाए।”

अजय खरे ने इस बात पर भी बल दिया कि आज अगर महिलाएं हर क्षेत्र में आगे हैं तो उसके पीछे ऐसे प्रेरणादायक कार्यक्रम, संस्थाएं और सतत मोटिवेशन ही मुख्य कारण हैं। समापन पर सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम में डा. दिवाकर सिंह ने भी शिरकत की और कहा कि बच्चों को मोबाइल से दूर कर पढ़ाई व याददाश्त बढ़ाने वाले अभ्यासों पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कुछ सरल लेकिन असरदार टिप्स भी दिए जिससे बच्चों का मानसिक विकास हो सके। पद्मा सिंह ने बेहद सटीक बात कही—“आज की बेटियों को सिर्फ स्कूल की किताबों तक सीमित नहीं रखा जा सकता, उन्हें आत्मरक्षा, आत्मबल और आत्मविश्वास के गुर भी सिखाने होंगे। ऐसी अकादमियां मानसिक और शारीरिक मजबूती का बेहतरीन माध्यम हैं।”

श्रुति कीर्ति सोसायटी समिति की अध्यक्ष पुष्पांजलि पांडेय ने बताया कि यह समर कैंप 1 मई से 31 मई तक चला, जिसमें बच्चों और महिलाओं को जूडो-कराटे के माध्यम से आत्मरक्षा के गुर सिखाए गए। इसके अलावा कैंप में मनोरंजन के लिए पूल पार्टी, आइसक्रीम पार्टी और विभिन्न स्पोर्ट्स गतिविधियां भी करवाई गईं, ताकि प्रतिभागियों को सीखने के साथ-साथ आनंद भी मिल सके। उन्होंने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया का विशेष धन्यवाद करते हुए सभी सहयोगियों के प्रति आभार जताया।

सोसायटी के सचिव राकेश तिवारी ने कहा कि इस भीषण गर्मी में भी सभी प्रतिभागियों, अतिथियों और आयोजकों ने जिस समर्पण से हिस्सा लिया, वह सराहनीय है। उन्होंने अजय खरे, डा. दिवाकर सिंह, पद्मा सिंह सहित सभी गणमान्य नागरिकों का आभार जताया।इस आयोजन ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि अगर सही दिशा में प्रयास हो, तो महिलाएं न केवल अपने लिए, बल्कि समाज के लिए भी मिसाल बन सकती हैं। श्रुति कीर्ति सोसायटी का यह प्रयास केवल एक समर कैंप नहीं था, यह सामाजिक क्रांति की एक छोटी—but शक्तिशाली—चिंगारी थी, जो अब मशाल बनकर रीवा की गली-गली में आत्मनिर्भरता का संदेश फैला रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

यह भी पढ़ें

जीते जी तो नरक झेला, अब मरने के बाद भी चैन नहीं!’ ग्राम पंचायत सीतापुर के डूडा दुआरी गाँव में 8 सालों से लटका है श्मशान घाट का निर्माण, गुस्साए ग्रामीणों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, दी आंदोलन की चेतावनी

सिंगरौली से लापता हुआ 6-चक्का ट्रक मऊगंज के सीतापुर में मिला लावारिस; चोरों ने उड़ाया ₹50,000 का माल, 2 बैटरियां और 250 लीटर डीजल पार; GPS से तलाशते हुए यहाँ तक पहुँचे ट्रक मालिक, थाना प्रभारी राम सिंह का बयान भी आया सामने

मध्य प्रदेश में दिव्यांगों के संवैधानिक अधिकारों की धज्जियाँ! ‘बाबाजी विश्वनाथ’ बस संचालक ने दिव्यांग कार्ड दिखाने पर भी नहीं दी 50% किराए की छूट, वसूला पूरा किराया; क्या मोहन यादव सरकार की साख सिर्फ कागजों पर है?

मऊगंज कलेक्ट्रेट और एसपी ऑफिस के सामने से पुलिस की ही 2 गाड़ियों की बैटरियां पार; 24 घंटे की सुरक्षा और सीसीटीवी के दावों की चोरों ने निकाली हवा, महकमे में मचा हड़कंप, जनता पूछ रही— ‘जब पुलिस खुद सुरक्षित नहीं, तो आम आदमी का क्या होगा?’