मऊगंज में शराब दुकान कर्मचारी की हत्या: परिजनों का फूटा गुस्सा, तीन पुलिसकर्मी लाइन अटैच, एक आरोपी गिरफ्तार, बाकी फरार

मऊगंज -लौर थाना क्षेत्र की पताई गांव में 21 मई को शराब दुकान में कार्यरत कर्मचारी मनोज कुमार पटेल पर हुए जानलेवा हमले की गूंज अब पूरे जिले में सुनाई दे रही है। घायल हालत में मनोज को अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया है। मंगलवार को जब परिजनों को अंतिम उम्मीद भी टूट गई, तो वे शव लेकर सीधे थाने पहुंचे और वहां जोरदार हंगामा किया। आक्रोशित परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए कि हमला पुलिस की मौजूदगी में हुआ, और थाने के तीन आरक्षक मौके पर मौजूद थे लेकिन उन्होंने किसी भी वरिष्ठ अधिकारी को सूचित नहीं किया। इस मामले को लेकर एसपी दिलीप कुमार सोनी ने तत्परता दिखाई और तुरंत जांच शुरू करवाई। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि आरक्षक अरुणेंद्र सिंह, देवेश चौबे और सूरज तिवारी बिना उच्चाधिकारियों को सूचना दिए घटनास्थल पर पहुंचे थे और संदिग्ध भूमिका में थे। नतीजतन, तीनों को लाइन अटैच कर दिया गया है। यह कार्रवाई 29 मई को शाम 4 बजे की गई।पुलिस ने इस मामले में पताई निवासी नित्यानंद मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि तीन अन्य आरोपी – विपुल गौतम, प्रवीण तिवारी और कार्तिकेय शुक्ला – अब भी फरार हैं। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम का गठन किया गया है और एसपी ने इन पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का आरोप है कि अगर पुलिस समय पर और गंभीरता से हस्तक्षेप करती, तो शायद मनोज की जान बचाई जा सकती थी। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि आखिर पुलिसकर्मी बिना सूचना दिए घटनास्थल पर क्या कर रहे थे और क्या उनकी मौजूदगी हमलावरों को ‘संरक्षण’ देने जैसी नहीं थी? अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कितनी पारदर्शिता और संवेदनशीलता दिखाता है। क्योंकि सवाल सिर्फ एक हत्या का नहीं है, सवाल है पुलिस की भूमिका, जवाबदेही और आम जनता के भरोसे का। अगर पुलिस पर से विश्वास उठ गया, तो न्याय की उम्मीद कहां बचेगी?

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