कलेक्टर की जनसुनवाई में फूटा दर्द — कुम्हार समाज की पहचान छीनी, किसानों की 300 एकड़ जमीन प्यासी!

मऊगंज – मंगलवार को मऊगंज कलेक्ट्रेट में जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर संजय कुमार जैन के सामने जब जनता ने अपनी पीड़ा रखी, तो दो मामलों ने सबका ध्यान खींचा—एक में पहचान छीने जाने का सवाल था, तो दूसरे में खेती उजड़ने का। पहला मामला प्रजापति समाज का था, जिनकी जातिगत पहचान ही प्रशासनिक फैसले की भेंट चढ़ चुकी है। अखिल भारतीय कुंभकार समाज के जिलाध्यक्ष राममिलन प्रजापति के नेतृत्व में समाज के 30 से अधिक लोग जनसुनवाई में पहुंचे और एक पत्र कलेक्टर को सौंपा। इसमें बताया गया कि 4 मार्च 2023 के बाद जब मऊगंज जिला रीवा से अलग हुआ, तब अनुसूचित जाति सूची के क्रमांक 35 से कुम्हार जाति (प्रजापति समाज) को हटा दिया गया। इस प्रशासनिक फेरबदल का खामियाजा समाज के गरीब और मेहनतकश लोगों को भुगतना पड़ रहा है। बिना जाति प्रमाण पत्र के उनके बच्चे स्कूल और कॉलेज में प्रवेश से वंचित हैं, तो वहीं युवाओं को सरकारी योजनाओं और नौकरियों में आरक्षण नहीं मिल रहा। प्रशासन की यह ‘न पहचान, न अधिकार’ नीति कहीं न कहीं सामाजिक बहिष्कार की ओर ले जा रही है। दूसरा मामला मऊगंज विकासखंड की ग्राम पंचायत बराब से आया, जहां ग्रामीण संतोष गौतम ने बताया कि सरकारी नहर पर अतिक्रमण के कारण इलाके की 300 एकड़ कृषि भूमि सिंचाई से वंचित है। चैन क्रमांक 45 पर बनी बम्बी के बहाव को कुछ लोगों ने इस तरह रोका है कि पानी दो कट ऊपर ही रुक जाता है, और खेतों तक पहुंच ही नहीं पाता। तीन साल से आवेदन करते-करते किसान थक चुके हैं, लेकिन अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई। खेत सूख रहे हैं, किसान परेशान हैं, लेकिन विभागों की फाइलें शायद अब तक टेबल से नहीं हिलीं। कलेक्टर संजय जैन ने पहले मामले में वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा कर शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया, और दूसरे मामले में सिंचाई विभाग को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।इसके अलावा, जनसुनवाई में आए 74 मामलों में से कुछ का तत्काल निराकरण किया गया, जबकि अन्य को संबंधित विभागों को अग्रेषित कर दिया गया। इस दौरान एसडीएम बीपी पांडे, खाद्य विभाग के प्रभारी जसराम जाटव, तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंक, महिला एवं बाल विकास और राजस्व विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे।

लेकिन सवाल यह है कि क्या फाइलों पर पड़े सरकारी आश्वासन वाकई जमीन पर दिखेंगे?
या फिर समाज की पहचान और किसानों की फसल दोनों ही प्रशासनिक जड़ता के नीचे कुचलते रहेंगे?

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