मऊगंज जिले के हाई स्कूल फरहदा में बच्चों की उपस्थिति बेहद कम, न स्कूल प्रशासन सक्रिय न ही अभिभावकों की जागरूकता

मऊगंज। जिले के हाई स्कूल फरहदा में बच्चों की उपस्थिति लगातार गिरती जा रही है। स्थिति इतनी चिंताजनक हो चुकी है कि कई विद्यार्थी रोज स्कूल नहीं पहुंचते, फिर भी न तो स्कूल प्रशासन की ओर से कोई नोटिस जारी किया जाता है और न ही छात्रों की तरफ से अनुपस्थिति का कोई आवेदन आता है। बच्चों के भविष्य के साथ हो रहा यह खिलवाड़ स्थानीय शिक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

विद्यालय का परिणाम हर वर्ष गिरता जा रहा है, खासकर हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी की परीक्षाओं में अधिकतर छात्र फेल हो जाते हैं। इसका एक बड़ा कारण यह है कि नियमित उपस्थिति न होने के बावजूद छात्रों के अभिभावकों तक कोई सूचना नहीं पहुंचाई जाती। शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों के घर नोटिस भेजना या परिजनों से संपर्क करना शिक्षा विभाग के नियमों का हिस्सा है, लेकिन स्कूल प्रशासन की ढिलाई के कारण यह प्रक्रिया लगभग बंद पड़ी है।

बच्चों ने खुद स्वीकार किया है कि स्कूल में पढ़ाई ठीक से नहीं होती, जिससे उनकी रुचि भी खत्म होती जा रही है। छात्रों का आरोप है कि शिक्षक स्कूल में आते तो हैं, पर ज्यादातर समय कुर्सियों पर बैठकर ही बिताते हैं और पढ़ाई पर ध्यान नहीं दिया जाता। दूसरी ओर, स्कूल स्तर पर बढ़ते भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता भी शिक्षा की गुणवत्ता को लगातार प्रभावित कर रही है।

सबसे गंभीर बात यह है कि अभी तक किसी भी अधिकारी ने इस स्थिति पर संज्ञान नहीं लिया है। अधिकांश छात्रों की कॉपियों में अभी तक पूरा पाठ्यक्रम भी पूरा नहीं कराया गया है। यदि यही हाल रहा तो आगामी परीक्षाओं में स्कूल का परिणाम और भी खराब हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप करते हुए स्कूल प्राचार्य को निर्देश देना चाहिए कि हर अनुपस्थित बच्चे के घर नोटिस पहुंचाया जाए और अभिभावकों को कारण बताना पड़े कि उनके बच्चे नियमित स्कूल क्यों नहीं आ रहे हैं। साथ ही, विद्यार्थियों की ओर से भी अनुपस्थिति की स्थिति में आवेदन अनिवार्य रूप से दिया जाना चाहिए।

स्कूल की लापरवाही, शिक्षकों की उदासीनता और अभिभावकों की अनदेखी—तीनों मिलकर बच्चों के भविष्य को जोखिम में डाल रहे हैं, जो अत्यंत चिंतनीय है। यदि समय रहते सुधारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो इसका सीधा असर आने वाले वर्षों के परिणाम और शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ेगा।

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