
मऊगंज जिले के प्रशासन द्वारा सड़क सुधार को लेकर किए जाने वाले दावे और ज़मीनी हालात में कितना बड़ा अंतर है, इसका ताज़ा और चौंकाने वाला उदाहरण मऊगंज–सीतापुर मार्ग पर एक बार फिर देखने को मिला। यह महत्वपूर्ण मार्ग अब सड़क से ज्यादा एक दलदल में तब्दील हो चुका है, जहाँ से गुजरना हर दिन लोगों के लिए जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है।
बीते दिन बरहटा मोड़ पर एक मरीज को लेकर जा रही एम्बुलेंस कीचड़ में ऐसी फँसी कि दो घंटे तक हिल नहीं सकी। मरीज की हालत बिगड़ती रही और स्थानीय लोग अपनी पूरी कोशिश से एम्बुलेंस को निकलवाने में लगे रहे, लेकिन सड़क की दयनीय स्थिति ने सारी कोशिशें बेअसर कर दीं। सबसे शर्मनाक बात यह रही कि इस दौरान प्रशासन, पुलिस या सड़क विभाग का एक भी कर्मचारी मौके पर नहीं पहुँचा। मदद के नाम पर सिर्फ स्थानीय लोग ही संघर्ष करते दिखाई दिए।
जानकारी के अनुसार, इस मार्ग के निर्माण का ठेका कई वर्ष पहले श्रीजी कंपनी को दिया गया था, लेकिन कंपनी ने काम को बीच में ही अधूरा छोड़ दिया। न तो सड़क का निर्माण पूरा किया गया और न ही जिम्मेदार अधिकारियों ने कंपनी पर किसी प्रकार की कड़ी कार्रवाई की। इसी लापरवाही का परिणाम है कि बरहटा मोड़ जैसे स्थानों पर सड़क पूरी तरह उखड़ चुकी है और गहरे गड्डे तथा कीचड़ यातायात को घंटों ठप कर देते हैं। ट्रैफिक जाम रोज की समस्या बन चुकी है, लेकिन इन्हें नियंत्रित करने के लिए पुलिस या प्रशासन का कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं दिखाई देता।
स्थानीय लोगों में भारी रोष है। उनका कहना है कि यह स्थिति प्रशासन की निष्क्रियता और उदासीन रवैये को खुले तौर पर उजागर करती है। लोगों का सवाल है कि क्या जिला प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना या किसी मरीज की मौत का इंतजार कर रहा है? आखिर ऐसी महत्वपूर्ण सड़क को सुधारने में इतनी लापरवाही क्यों बरती जा रही है?
ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही श्रीजी कंपनी का टेंडर निरस्त कर नई एजेंसी को काम नहीं सौंपा गया, या तत्काल निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। लोगों का कहना है कि अब प्रशासन को अपनी मंशा साफ करनी ही होगी—जनता सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि वास्तविक काम चाहती है।













