
मऊगंज के वार्ड नंबर 8 में मंगलवार की शाम एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया। अपने घर के पास रोज की तरह टहल रहे बुज़ुर्ग जगदीश प्रसाद की एक तेज़ रफ्तार बाइक ने टक्कर मारकर जान ले ली। हादसा इतना भयानक था कि जगदीश प्रसाद सड़क पर गिरते ही बेहोश हो गए। परिजनों ने बिना देर किए उन्हें सिविल अस्पताल मऊगंज पहुंचाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी — डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना की गंभीरता तब और बढ़ गई जब जांच में सामने आया कि जिस बाइक ने टक्कर मारी, उस पर नंबर प्लेट ही नहीं थी। यानी साफ है कि बाइक अवैध या गैरकानूनी ढंग से सड़कों पर दौड़ रही थी। हादसे के बाद बाइक सवार मौके से फरार हो गया। पुलिस जांच में यह भी उजागर हुआ है कि बाइक चला रहा युवक देवरी थाना क्षेत्र के मऊगंज निवासी वंश बहादुर सिंह, पुत्र सुखदेव सिंह है। यह जानकारी मिलते ही परिजनों ने थाने में आरोपी के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराई। लेकिन अफ़सोस की बात यह है कि अभी तक आरोपी को गिरफ़्तार नहीं किया गया है।स्थानीय लोगों का कहना है कि तेज रफ्तार और लापरवाह बाइक सवारों ने मऊगंज की सड़कों को जानलेवा बना दिया है। पुलिस कार्रवाई की रफ्तार भी सवालों के घेरे में है। आखिर कब तक मासूम लोग ऐसे बेलगाम रफ्तार के शिकार होते रहेंगे? प्रधान आरक्षक राजेन्द्र सिंह ने बताया कि मृतक का पंचनामा कर पोस्टमॉर्टम कराया गया और फिर शव को परिजनों को सौंप दिया गया है। वहीं, पुलिस का कहना है कि आरोपी की तलाश जारी है और जल्द ही उसे पकड़ लिया जाएगा। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि बिना नंबर की बाइक सड़क पर चल कैसे रही थी? और क्या सिर्फ आरोपी को पकड़ लेना काफी होगा, जब तक ऐसे मामलों में सख़्त कार्यवाही और जवाबदेही तय नहीं होती? इस हादसे ने न सिर्फ़ एक परिवार से उसका सदस्य छीना है, बल्कि मऊगंज की सड़कों की लचर सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस, प्रशासन और समाज — सभी को अब जागना होगा, वरना अगली लाश किसी और के घर से उठेगी।













