
नई दिल्ली। जीएसटी परिषद की बैठक में कर ढांचे को सरल बनाने के उद्देश्य से ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। परिषद ने 12% और 28% की टैक्स स्लैब को खत्म करने का फैसला किया है। लंबे समय से देशभर में कारोबारियों और उपभोक्ताओं की ओर से कर प्रणाली को आसान बनाने की मांग उठ रही थी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से न केवल कारोबारियों को राहत मिलेगी, बल्कि उपभोक्ताओं के लिए भी वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें समझना आसान हो जाएगा।
परिषद का यह फैसला कर सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे टैक्स स्ट्रक्चर अब और भी पारदर्शी व सरल बनेगा। जानकारों का कहना है कि टैक्स स्लैब कम होने से टैक्स चोरी पर भी अंकुश लगेगा और सरकार की राजस्व वसूली अधिक प्रभावी होगी।
वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, परिषद का मुख्य उद्देश्य आम लोगों को राहत देना और कर व्यवस्था को सरल बनाना है। अब तक कई उत्पादों पर 12% और 28% का टैक्स लगता था, जिन्हें हटाए जाने के बाद नई दरें तय होंगी और इसे लागू करने के लिए अधिसूचना जल्द जारी की जाएगी।
आर्थिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस कदम से देश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक असर पड़ेगा और व्यापारिक माहौल बेहतर होगा। परिषद ने स्पष्ट किया है कि कर दरों में यह सुधार आम जनता की सहूलियत और व्यापारिक पारदर्शिता को ध्यान में रखकर किया गया है।













