मऊगंज में राशन माफिया का महा-खुलासा: अमीरों की तिजोरी में गरीबों का अनाज! मोहन सरकार के सुशासन में माफियाओं का ‘अंत्योदय

गाड़ी, बंगला और सरकारी नौकरी वालों के पास बीपीएल कार्ड; असली गरीबों और दिव्यांगों को तहसीलदार ने दिखाया बाहर का रास्ता! क्या ‘भ्रष्टाचार की भेंट’ चढ़ गए गरीबों के निवाले?

मऊगंज। मध्य प्रदेश की मोहन सरकार मंचों से दहाड़ती है कि उनकी सरकार गरीबों और वंचितों के लिए समर्पित है। लेकिन मुख्यमंत्री जी, मऊगंज जिले की ज़मीनी हकीकत आपके दावों को लहूलुहान कर रही है। यहाँ गरीबों का राशन अमीरों की गाड़ियों में भर रहा है। ‘इंडिया हेडलाइन 24’ की पड़ताल में एक ऐसा भंडाफोड़ हुआ है जिसे सुनकर आप हैरान रह जाएंगे—मऊगंज में जिनके पास आलीशान घर, गाड़ियां, बैंक बैलेंस और सरकारी नौकरियां हैं, उनके पास बीपीएल और अंत्योदय राशन कार्ड की ‘ढाल’ है।मऊगंज तहसील कार्यालय भ्रष्टाचार का ऐसा अड्डा बन चुका है जहाँ ‘लेने-देन’ में सक्षम रसूखदारों के राशन कार्ड रातों-रात बन जाते हैं। पिछले 5 सालों में तहसीलदार और संबंधित अधिकारियों ने ऐसे दर्जनों कार्ड जारी किए हैं जो पूरी तरह अपात्र हैं। वहीं दूसरी ओर, वास्तविक गरीब, जिनके पास न ज़मीन है और न सिर छिपाने को पक्की छत, उन्हें दफ्तरों से दुत्कार कर भगा दिया जाता है। सबसे शर्मनाक बात यह है कि मऊगंज जिले में कई ऐसे दिव्यांग और शरीर से विकलांग व्यक्ति हैं जो अन्न के एक-एक दाने के लिए मोहताज हैं। जब ये बेचारे राशन कार्ड के लिए आवेदन करते हैं, तो भ्रष्ट अधिकारी बिना किसी जांच के उनके आवेदन निरस्त कर देते हैं। क्या मऊगंज के अधिकारियों के लिए दिव्यांगों का हक मारना ही ‘सुशासन’ है? यह खेल बिना किसी बड़े संरक्षण के मुमकिन नहीं है। क्या शासन-प्रशासन इसकी वास्तविकता में जांच क्यों नहीं करता? शायद इसलिए क्योंकि जांच हुई तो उनके अपने ही अधिकारियों, कर्मचारियों और रसूखदार नेताओं का भंडाफोड़ हो जाएगा। जिनके पास पर्याप्त अनाज और दौलत है, उन्हें सरकारी कोटे का सस्ता राशन दिया जा रहा है और जो वास्तव में भूखे हैं, वे सरकारी चौखट पर दम तोड़ रहे हैं। कलेक्टर साहब, क्या आप उन राशन कार्डों की लिस्ट सार्वजनिक करेंगे जो पिछले 5 सालों में रसूखदारों के बनाए गए हैं? मोहन सरकार के मंत्री क्या मऊगंज आकर उन दिव्यांगों का दर्द सुनेंगे जिनके आवेदन कचरे के डिब्बे में डाल दिए गए? क्या उन तहसीलदार और अधिकारियों की संपत्ति की जांच होगी जिन्होंने नोटों की गड्डी लेकर अमीरों को ‘बीपीएल’ बना दिया? मैं शरीर से दिव्यांग जरूर हूँ, लेकिन मेरी आवाज़ और मेरा दिमाग गरीबों के हक के लिए हमेशा बुलंद रहेगा। मऊगंज के भ्रष्ट अधिकारियों को अब ‘इंडिया हेडलाइन 24’ चैन से बैठने नहीं देगा। जब तक हर पात्र गरीब को उसका राशन कार्ड नहीं मिलता, हमारी यह जंग जारी रहेगी।

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