MP में सड़क मांगने पर BJP सांसद बोले – ‘डेट बताओ, उठवा लेंगे!’ – गर्भवती महिलाओं की गुहार पर विवादास्पद प्रतिक्रिया

सीधी, मध्यप्रदेश |  मध्यप्रदेश के सीधी जिले से बीजेपी सांसद राजेश मिश्रा का एक बयान इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक चर्चा का विषय बना हुआ है। मामला एक गर्भवती महिला की सड़क निर्माण को लेकर की गई अपील का है, जिसमें सांसद के जवाब ने न केवल संवेदनहीनता की हदें पार कर दीं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

लीला साहू की गुहार – “रोड नहीं बनी तो एंबुलेंस कैसे आएगी?”

बीते 3 जुलाई को सीधी जिले की रहने वाली गर्भवती महिला लीला साहू ने अपनी एक दोस्त के साथ मिलकर एक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। वीडियो में उन्होंने बेहद भावुक होकर सांसद से सीधे सवाल पूछे। लीला का कहना है कि सांसद राजेश मिश्रा ने पिछले साल सड़क निर्माण का वादा किया था, लेकिन आज तक कोई काम शुरू नहीं हुआ।

लीला ने कहा,-“सांसद जी, जब आपमें हिम्मत नहीं थी सड़क बनवाने की, तो झूठा वादा क्यों किया? मैं नितिन गडकरी या मोदी जी से मिलती, तो शायद कुछ होता।” लीला ने आगे कहा कि वह गर्भवती हैं और उनका 9वां महीना चल रहा है। उन्होंने चेताया कि अगर किसी भी वक्त डिलिवरी की स्थिति बनी और सड़क नहीं बनी रही, तो एंबुलेंस तक नहीं आ पाएगी – और इसकी पूरी जिम्मेदारी सांसद की होगी।

दो महिलाएं, एक पीड़ा – “कभी भी दर्द उठ सकता है”

वीडियो में लीला के साथ मौजूद दूसरी महिला भी गर्भवती हैं। वह कहती हैं, कभी भी प्रसव पीड़ा हो सकती है। सड़क नहीं है, तो एंबुलेंस कैसे आएगी? हमारा क्या होगा?” इस मार्मिक अपील को लेकर पूरे क्षेत्र में सहानुभूति की लहर दौड़ गई। स्थानीय लोग भी इस मांग को जायज बता रहे हैं और सड़क निर्माण में हो रही लापरवाही पर नाराजगी जता रहे हैं।

सांसद का जवाब – संवेदनहीनता या सत्ता का अहंकार?

जहां जनता उम्मीद कर रही थी कि सांसद समाधान बताएंगे, वहीं राजेश मिश्रा का बयान आग में घी का काम कर गया। उन्होंने कहा: अगर डिलिवरी की जरूरत है तो कुछ दिन पहले अस्पताल में भर्ती हो जाएं। लीला साहू डिलिवरी की डेट बता दें,तो उन्हें उठवा लेंगे।” इस बयान को लेकर विपक्ष, सोशल मीडिया और आम जनमानस में तीखी प्रतिक्रिया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह सांसद का कर्तव्य है या फिर सत्ता का दंभ?

https://x.com/Deepeshpatel87/status/1941776692021785062

राजनैतिक तापमान गरम

बयान के बाद सियासत गर्म हो गई है। कांग्रेस समेत कई सामाजिक संगठनों ने इसे “अत्यंत अमानवीय” और “महिलाओं के सम्मान के खिलाफ” बताया है। क्षेत्र में प्रदर्शन की भी आशंका जताई जा रही है।

सवाल वही – कब बनेगी सड़क?

संसद में बैठकर योजनाओं की घोषणाएं करना आसान है, लेकिन ज़मीन पर जरूरतमंदों की बात सुनना ही असली लोकतंत्र है। सवाल ये नहीं है कि सांसद उठवाने की बात कर रहे हैं, सवाल यह है कि जब एक गर्भवती महिला सड़क के लिए हाथ जोड़ रही है – तब भी क्या सिस्टम बहरी बना रहेगा?

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