मऊगंज में ‘विकास’ के नाम पर बिछाया मौत का जाल: MPRDC की लापरवाही से गड्ढे में गिरी गौमाता, स्थानीय लोगों ने बचाई जान

अधूरी नाली और खुले गड्ढे बने राहगीरों के लिए काल; वैश्य महासम्मेलन के अध्यक्ष ने साथियों संग किया रेस्क्यू, दीपक गुप्ता का सवाल— “क्या किसी मौत के बाद जागेगा प्रशासन?”

मऊगंज । मऊगंज जिला मुख्यालय के बरहटा रोड पर इन दिनों विकास कम और विनाश के संकेत ज्यादा मिल रहे हैं। MPRDC (एमपीआरडीसी) द्वारा बनाई जा रही नाली का निर्माण कार्य न केवल कछुआ गति से चल रहा है, बल्कि सड़क किनारे खोदे गए गहरे गड्ढे अब बेगुनाह मवेशियों और राहगीरों के लिए ‘डेथ ट्रैप’ बन चुके हैं। निर्माण कंपनी की इस घोर लापरवाही का खामियाजा बीती रात एक बेसहारा गौवंश को भुगतना पड़ा।

जान जोखिम में डालकर किया गौवंश का रेस्क्यू

घटना मऊगंज बरहटा रोड के वार्ड क्रमांक 2 की है, जहाँ आधी-अधूरी नाली बनाकर किनारे गहरे गड्ढे खुले छोड़ दिए गए हैं। बीती रात एक गाय इन गड्ढों में गिरकर फंस गई। आज सुबह जब स्थानीय नागरिक भ्रमण पर निकले, तो उनकी नजर तड़प रही गौमाता पर पड़ी। तत्काल वैश्य महासम्मेलन मध्य प्रदेश के जिला अध्यक्ष सुलेद्र कुमार गुप्ता ने अपने साथियों भास्कर मिश्रा, शंकर लाल गुप्ता, वीरेंद्र सोनी, मनीष पटेल और मुन्ना उपाध्याय के साथ मिलकर मोर्चा संभाला। घंटों की कड़ी मशक्कत और जान जोखिम में डालकर टीम ने गौमाता को सुरक्षित बाहर निकाला।

“इंसान मरता तो होता चक्काजाम, मवेशियों की जान की कीमत नहीं?”

रेस्क्यू में शामिल साथियों ने प्रशासन और निर्माण कंपनी के खिलाफ भारी आक्रोश व्यक्त किया है। सुलेद्र कुमार गुप्ता ने तीखा सवाल करते हुए कहा कि “आज एक बेजुबान जानवर गड्ढे में गिरा है, इसलिए शायद प्रशासन को फर्क नहीं पड़ता। अगर यही घटना किसी इंसान के साथ होती और जान चली जाती, तो लोग सड़क पर शव रखकर चक्काजाम कर देते।” सवाल यह है कि आखिर निर्माण कंपनी ने इन गड्ढों को ढकने या बैरिकेडिंग करने की जहमत क्यों नहीं उठाई?

 चेतावनी:

  • MPRDC के अधिकारी दफ्तरों में बैठकर किस ‘बड़ी अनहोनी’ का इंतजार कर रहे हैं?

  • क्या मऊगंज कलेक्टर उन ठेकेदारों पर कार्रवाई करेंगे जो सुरक्षा मानकों को ठेंगा दिखाकर काम कर रहे हैं?

  • वार्ड क्रमांक 2 की जनता पूछ रही है कि इन खुले गड्ढों को भरकर सुरक्षा कब सुनिश्चित की जाएगी?

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