बहुती उपार्जन केंद्र में किसानों का ‘खून-पसीना’ बारिश में बहा: व्यापारियों से सांठगांठ और किसानों से भेदभाव का आरोप!

भीग गया गेहूं और वरदाना, लेकिन नहीं पसीजा केंद्र प्रभारी का दिल; लक्ष्मण पटेल बोले— “व्यापारियों की तौल जारी, गरीब किसान बेहाल”, क्या यही है मोहन सरकार का सुशासन?

मऊगंज । मऊगंज जिले के नईगढ़ी जनपद अंतर्गत बहुती गेहूं उपार्जन केंद्र इन दिनों भ्रष्टाचार और अव्यवस्था का अड्डा बन चुका है। एक ओर आसमान से बरसती आफत ने किसानों की कमर तोड़ दी है, तो दूसरी ओर केंद्र प्रबंधन के पक्षपातपूर्ण रवैये ने अन्नदाताओं को खून के आंसू रुलाने पर मजबूर कर दिया है। यहाँ खुले आसमान के नीचे रखा किसानों का अनाज और सरकारी वरदाना बारिश में पूरी तरह भीग चुका है, लेकिन जिम्मेदारों के कान पर जूँ तक नहीं रेंग रही है।

“व्यापारियों की चांदी, किसानों की बर्बादी”

वार्ड क्रमांक 05 के निवासी किसान लक्ष्मण पटेल ने केंद्र प्रबंधन की पोल खोलते हुए बताया कि वे सुबह से अपनी उपज लेकर तौल का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि केंद्र प्रभारी व्यापारियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। जहाँ व्यापारियों की उपज की तौल धड़ल्ले से की जा रही है, वहीं आम किसानों को घंटों लाइन में खड़ा कर पक्षपात किया जा रहा है।

 बारिश में भीगा ‘अन्न’, दावों की खुली पोल

उपार्जन केंद्र पर सुरक्षा के इंतजाम शून्य हैं। न तो अनाज को ढकने के लिए तिरपाल की व्यवस्था है और न ही जल निकासी के उचित प्रबंध। बारिश के कारण न केवल किसानों का गेहूं बल्कि खाली बोरियां (वरदाना) भी पानी में डूब गईं। हालात इतने बदतर हैं कि किसानों को मजबूरी में खुद ही पानी खरीदकर और अस्थायी जुगाड़ कर अपनी फसल बचाने की कोशिश करनी पड़ रही है।

 सीधे सवाल:

  • मुख्यमंत्री मोहन यादव किसानों के हित में बड़ी-बड़ी घोषणाएं करते हैं, लेकिन मऊगंज के केंद्रों पर अधिकारियों की मनमानी क्यों जारी है?

  • उपार्जन केंद्र पर तिरपाल और भंडारण की राशि कहाँ डकार ली गई कि अनाज खुले में भीग रहा है?

  • क्या जिला प्रशासन उन केंद्र प्रभारियों पर कार्रवाई करेगा जो किसानों को छोड़कर व्यापारियों की उपज को तवज्जो दे रहे हैं?

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