मऊगंज में आवारा मवेशियों की समस्या गंभीर होती जा रही है। खेतों को नुकसान, सड़क हादसे और कलेक्टर के आदेश के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं। किसान परेशान।

मऊगंज। जिला मुख्यालय और ग्रामीण इलाकों में आवारा मवेशियों का संकट लगातार बढ़ता जा रहा है। शहर की सड़कों से लेकर ग्रामीण गलियों और खेतों तक — हर जगह मवेशियों के झुंड दिखाई दे रहे हैं। इनसे न केवल ट्रैफिक बाधित होता है, बल्कि रोज़ाना दुर्घटनाएँ भी हो रही हैं। रात के समय अचानक सड़क पर दौड़कर आ जाने वाले मवेशी, वाहन चालकों और पैदल यात्रियों की जान को जोखिम में डाल रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की समस्या और गंभीर है। किसानों का कहना है— महीनों की मेहनत, बीज और खाद पर खर्च… और फसल एक रात में खत्म। शिकायत करो तो सिर्फ आश्वासन मिलता है। गौशालाओं पर करोड़ों खर्च होने के बावजूद हालात जस के तस हैं। कई गौशालाओं में न तो पर्याप्त चारा मिलता है, न ही नियमित देखभाल। कागज़ों में गौशालाएँ सक्रिय हैं, मैदान में मवेशियों का आतंक। कुछ महीने पहले कलेक्टर ने सख्त आदेश जारी किए थे — यदि सड़क पर आवारा गोवंश मिला, तो संबंधित पंचायत सचिव का निलंबन होगा और नगरपालिका अधिकारी पर कार्रवाई की जाएगी। लेकिन हकीकत यह है कि किसी भी अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का सवाल वाजिब है — “योजनाएँ हैं, बजट है, आदेश हैं… तो समाधान क्यों नहीं? अब ग्रामीण और किसान उम्मीद लगाए हुए हैं कि प्रशासन इस मुद्दे पर वास्तविक और सख्त कार्रवाई करे, ताकि गौशाला पशुओं का सहारा बन सके — न कि केवल फाइलों में दर्ज एक योजना।













