भीषण बारिश में भी नहीं डिगी आस्था, हाटेश्वरनाथ मंदिर में कांवरियों का सैलाब

मऊगंज।श्रावण मास के अंतिम सोमवार को मऊगंज जिले के हनुमना क्षेत्र स्थित ऐतिहासिक हाटेश्वर नाथ मंदिर में भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। हजारों श्रद्धालु भले ही मूसलाधार बारिश से भीगे हों, लेकिन उनके मन में शिवभक्ति की ज्वाला प्रज्वलित रही। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह बन्ना की अगुवाई में श्रद्धालुओं ने हनुमना के अमिलेश्वर नाथ अमिला नाला से जल भरकर कांवर यात्रा निकाली और पैदल चलते हुए हाटेश्वरनाथ मंदिर पहुँचकर जलाभिषेक किया।

श्रद्धा की इस अनोखी यात्रा ने यह प्रमाणित कर दिया कि प्राकृतिक आपदाएँ भी जब भोलेनाथ की आराधना की बात आती है तो श्रद्धालुओं के संकल्प को डिगा नहीं सकतीं। चारों ओर “बोल बम” के जयकारे गूंजते रहे और वातावरण शिवमय हो गया।

यात्रा के उपरांत बोल बम कांवरिया संघ हनुमना द्वारा विशाल भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस आयोजन को सफल बनाने में वैश्य महासम्मेलन मऊगंज के जिलाध्यक्ष अखिलेश गुप्ता, गांधी कमेटी हनुमना के अध्यक्ष राजा बाबू गुप्ता, तारकेश्वर गुप्ता, संजू गुप्ता, निशांक केशरी, अजय गुप्ता, रेवती रमन गुप्ता, महेश गुप्ता सहित अन्य सदस्यों की भूमिका सराहनीय रही।

पूर्व विधायक सुखेंद्र सिंह बन्ना ने मीडिया के माध्यम से क्षेत्रवासियों को सावन की शुभकामनाएं देते हुए कहा,

“भगवान हाटेश्वर नाथ की कृपा से यह क्षेत्र सदा समृद्ध रहा है। श्रद्धालुओं का यह सैलाब इस बात का प्रतीक है कि आस्था को बारिश, रास्ते या कठिनाई नहीं रोक सकती। हम सभी को यह प्रयास जारी रखना है कि आने वाली पीढ़ियाँ भी इस परंपरा से जुड़ी रहें।”

ग्राम पंचायत हाटा के सरपंच महेंद्र प्रताप सिंह ने समस्त श्रद्धालुओं के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि हमारे ग्राम में इतना बड़ा धार्मिक स्थल है और हमें सेवा का यह अवसर बार-बार मिलता है।

पुजारी उमाशंकर गिरी ने मंदिर के इतिहास को साझा करते हुए बताया कि

“यह मंदिर करीब 300 वर्ष पूर्व उस समय निर्मित हुआ जब चरैया के मरशाह पाठक की फांसी की सजा भगवान भोलेनाथ की कृपा से टल गई थी। उसी चमत्कार के स्मरण में इस भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया।”

हालांकि मंदिर परिसर में अतिक्रमण की समस्या आज भी बनी हुई है। पुजारी सदाशिव भारतीय ने इस विषय पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि

“माननीय हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद मंदिर की भूमि से अब तक संपूर्ण अतिक्रमण नहीं हटाया गया है, जो कि श्रद्धालुओं की आस्था पर एक प्रकार से चोट है।”

 यह आयोजन आस्था, संगठन, और समर्पण का प्रतीक बनकर उभरा है। श्रद्धालुओं का उत्साह, समिति की सेवा भावना और जनप्रतिनिधियों की सहभागिता से यह पर्व न सिर्फ धार्मिक आयोजन बना, बल्कि क्षेत्रीय एकता और परंपरा की पहचान बन गया।

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