
रीवा जिले के त्योंथर जनपद की ग्राम पंचायत मदरो के काल्ही गांव से एक बेहद शर्मनाक और दिल दहला देने वाली तस्वीर सामने आई है। जहां 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला पार्वती सिंह को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाने के लिए एम्बुलेंस नहीं आई, और मजबूरी में परिजन उन्हें हाथ ठेले में लिटाकर अस्पताल तक ले गए।
बताया गया कि पार्वती सिंह की तबीयत अचानक बिगड़ गई। खराब सड़क पर चलते हुए वे फिसल गईं और उनके हाथ में गंभीर चोट आ गई। तत्काल मदद के लिए एम्बुलेंस को फोन किया गया, लेकिन गांव की सड़क की दुर्दशा को देखते हुए एम्बुलेंस कर्मियों ने वहां आने से इनकार कर दिया। गांव की हालत इतनी बदतर है कि करीब 2 किलोमीटर तक कीचड़ और पानी से भरी सड़क ने जीवन रक्षक एम्बुलेंस तक को मजबूर कर दिया।
परिवार को हार माननी पड़ी और फिर हाथ ठेले का सहारा लिया गया। गंदगी और कीचड़ से भरे रास्ते पर ठेले में बीमार बुजुर्ग को लेकर चलना किसी संघर्ष से कम नहीं था। परिजनों ने उन्हें जैसे-तैसे मुख्य मार्ग तक पहुंचाया, जहां से फिर उन्हें संजय गांधी अस्पताल लाया जा सका।
दीपक सिंह, जो पीड़िता के पोते हैं, उन्होंने बताया कि वे लंबे समय से इस सड़क की समस्या को लेकर प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर भी कई बार शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन या तो शिकायत बंद कर दी गई या फिर उसे गंभीरता से नहीं लिया गया। दीपक का यह भी आरोप है कि जब उन्होंने दोबारा शिकायत करने की बात की, तो उन्हें धमकियां तक दी गईं।
दीपक सिंह ने बताया:
“मैं काल्ही गांव का निवासी हूं। मेरी दादी पार्वती सिंह के साथ जो हुआ, वह हर गांववासी के साथ कभी भी हो सकता है। हमने सीसी सड़क निर्माण के लिए आवेदन भी दिया था लेकिन सरपंच और सचिव पैसा निकालकर खुद खा गए। यह भ्रष्टाचार की जीती जागती मिसाल है। बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, और मरीज अस्पताल तक नहीं पहुंच पाते। यह किस तरह का शासन है?”
जब इस मामले पर गांव की सरपंच सपिता सिंह और सचिव लालता प्रसाद आदिवासी से सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण के लिए अभी तक कोई स्वीकृति नहीं मिली है। मिट्टी डालकर रास्ता थोड़ा बेहतर करने की कोशिश की गई है, लेकिन जब तक बजट और अनुमति नहीं मिलती, वे कुछ नहीं कर सकते।
इस पूरे मामले में अब प्रशासन हरकत में आया है। रीवा कलेक्टर प्रतिभा पाल ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जनपद सीईओ को तत्काल जांच करने और रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। साथ ही सड़क निर्माण को लेकर जो भी आवश्यक कदम हैं, उन्हें प्राथमिकता से पूरा करने के लिए कहा गया है।
यह सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं है, यह उस तंत्र की तस्वीर है जहां योजनाएं सिर्फ कागजों में बनती हैं, और ज़मीनी हकीकत में लोगों को कीचड़ से लथपथ होकर ठेले में लिटाकर इंसानियत की मौत देखनी पड़ती है।













